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मजबूत इरादों और जिम्मेदारियों का नाम है ‘पिता’

Posted On: 8 Jun, 2016 Junction Forum में

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‘भुला के नींद अपनी सुलाया हमको, गिराकर आंसू खुद हंसाया हमको,  जिसने सिखाया भीड़ मे अलग पहचान बनाना वो थे मेरे पापा’


इंसान जब सबसे पहले इस दुनिया में आता है तो सबसे पहले अपनी मां को पहचानता है लेकिन गुजरते वक्त के साथ उसका रिश्ता अपने पिता के साथ भी जुड़ता जाता है. दुनिया का हर पिता चाहता है कि उसका बच्चा मजबूत बने. साथ ही जिदंगी के हर उतार-चढ़ाव को झेलता हुआ जिदंगी जीने का हुनर सीखें. ऐसे में हम सभी के जीवन में ऐसे पल भी आये होंगे जब पिता ने हमें किसी बात पर डांटा या फटकारा होगा.


उस समय तो हमें पिता का ये व्यवहार बहुत ही बुरा लगा होगा लेकिन उम्र बीतने के साथ आज उस डांट-फटकार की प्रासंगिकता समझ आती होगी. देखा जाए तो सभी लोगों का अपने पिता से अलग तरह का रिश्ता होता है. किसी के लिए पिता एक दोस्त है तो किसी के लिए बड़ा भाई, किसी के लिए पिता एक मार्गदर्शक की तरह है जो हर तरह की परेशानियों के समय संतान को याद आता है.



इसी तरह पिता आपके जीवन में क्या महत्व रखते हैं और आपका उनके साथ किस तरह का रिश्ता है? साथ ही आपके पिता के बिताए हुए यादगार लम्हे और खट्टी-मीठी यादें आज आपके जीवन में क्या महत्व रखती है. बेशक इन सभी सवालों का जवाब सिर्फ आप जानते होंगे, जिन्हें शब्दों में बयां कर पाना बेहद मुश्किल है. जीवन में पिता से जुड़ी हुई कोई ऐसी घटना भी होगी जो आपके लिए मील का पत्थर साबित हुई होगी.

अगर आपके पास भी अपने पिता से जुड़ा ऐसा ही कोई यादगार अनुभव  है तो आप इस ‘फादर्स डे’ अपने अनुभव ‘जागरण जक्शंन’ मंच के साथ शेयर कर सकते हैं.


नोट : अपना ब्लॉग लिखते समय इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय न हो तथा किसी की भावनाओं को चोट न पहुंचाते हो.



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