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ब्लॉग निमंत्रण: कैसा हो आपके सपनों का भारत

Posted On: 16 Jan, 2015 Others में

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इस बार 26 जनवरी को जब ऊषा की पहली किरण निकलेगी तब शायद समूचे भारत में गणतंत्र दिवस समारोह खत्म हो रहा होगा। लेकिन उस किरण के निकलने के साथ ही भारत अपने अब तक के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ चुका होगा। एक ऐसा अध्याय जिसमें आज़ादी के बाद योजना आयोग की जरूरत दर्ज़ थी और अब नीति आयोग की।


इन 65 वर्षों के सफर में हमने अच्छे पलों को मिलकर जीया और कई कड़वे पलों में हमारी एकजुटता ने समूची दुनिया को अचम्भित कर दिया। इस दौरान हमने धीमे रफ्तार से ही सही लेकिन काफी भौतिक प्रगति की। एक समय ऐसा भी आया जब पिछले सरकार के घोटालों, नेताओं और मंत्रियों का जनता से संवाद टूटने से एक घुटन और असंतोष भरा माहौल बना जिसने लोगों के दिलो-दिमाग में संसदीय प्रणाली के प्रति बढ़ रहे उनके अविश्वास को ताव दी।


लेकिन मई 2014 में जनता ने करीब 30 वर्षों बाद भाजपा को बहुमत देकर देश की बागडोर उनके हाथों में सौंप दी। इसी के साथ जनसंघ की स्थापना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उनके स्थापना के समय से किये जा रहे अथक प्रयासों का सुखद परिणाम उन्हें देखने को मिला।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद सम्भालते ही वैश्विक जगत और विशेष रूप से पड़ोसी देशों से कूटनीतिक संबंधों को नया आयाम दिया। कई पुराने और गैर-जरूरी कानूनों को बदलने की इच्छा और जनता से सीधे संवाद करने के लिए ‘आकाशवाणी’ और ‘दूरदर्शन’ का प्रयोग लोगों के दिलों में लोकतंत्र की पुर्नबहाली की दिशा में एक महत्तवपूर्ण कदम साबित होते दिख रही है। लेकिन इसके साथ ही ‘घर-वापसी’ और ‘लव-जेहाद’ जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।


इन सब के बावजूद हर भारतीय एक ‘सशक्त भारत’ को बनते और बढ़ते देखना चाहता है। एक ऐसा भारत जो हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो, सामरिक और कूटनीतिक रूप से सशक्त हो! यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ऐसे मज़बूत भारत का सपना हर भारतीय के दिलों में होगा।


और अगर आपके मन-मस्तिष्क में भी ‘भविष्य के भारत’ को लेकर कोई विचार, सुझाव या सपना है जिसे आप पूरी दुनिया को बताना चाहते हों तो जागरण जंक्शन दे रहा है आपको ये मौका!


नोट: अपना ब्लॉग लिखते समय इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुँचाते हों।



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

lavanya के द्वारा
January 20, 2015

सारे जहां से अच्छा हो मेरे सपनों का भारत हो ….

shaktisingh के द्वारा
January 20, 2015

मेरे सपनों का भारत ऐसा हो जहां हर व्यक्ति के पास रोजगार हो, जरूरतमंद लोगों को आवास तथा भ्रष्टाचारमुक्त राष्ट्र हो. मैं जनता के प्रतिनिधियों से यही उम्मीद करता हूं कि वह लोगों भ्रमित न करें और उपरोक्त सपनों को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ जुड़ जाएं….धन्यवाद!!!!!!

चन्दन भाई पटना वाला के द्वारा
January 20, 2015

भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही सपनोँ का भारत बनाने का सपना देखा जाने लगा. हर साल राष्ट्रीय पर्व आते ही यह सवाल उठाने लगता है कि अपना सपनों का भारत कैसा हो… हर साल भारत की जनता एक ही सपना देखती है और फिर अस्वासन पा कर अपने रंजो-गम में मस्त हो जाती है. भईया अब और कितना सपना दिखाओगें ……. अबकी वार कोई सपना नहीं देखना है…  

nityanand rai के द्वारा
January 20, 2015

मेरे सपनों के भारत में हर किसी को सपने देखने की आजादी होगी और सपनों को हकीकत में बदलने की उम्मीद होगी…


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