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क्या बदलाव ला पाएंगे राहुल गांधी?

Posted On: 23 Jan, 2013 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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जयपुर में लगे चिंतन शिविर में काँग्रेस ने अपने युवराज को आधिकारिक तौर पर पार्टी के उपाध्यक्ष का पद प्रदान कर दिया. हालांकि यह किसी के लिए भी हैरानी की बात तो नहीं होगी क्योंकि जब से सोनिया गांधी को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और राहुल गांधी ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा तभी से शायद सभी को इस बात का अहसास जरूर हो गया होगा कि अगर सोनिया गांधी को पार्टी में प्रथम स्थान दिया गया है तो पार्टी का दूसरा स्थान उनके पुत्र राहुल गांधी के लिए सुरक्षित है.


इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों और वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अगर देखा जाए तो काँग्रेस ने राहुल गांधी पर जिम्मेदारियों का एक बोझ सा डाल दिया है. महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोपों को झेल रही काँग्रेस के लिए आगामी चुनाव टेढ़ी खीर साबित होने वाले हैं.


उपाध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने जो भाषण दिया उसे सुनकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और सभी कार्यकर्ता गदगद हो उठे. राहुल के भावुक शब्दों ने सभी को भीतर तक छू लिया. लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में राहुल गांधी के इन शब्दों का भावात्मक रूप से कोई अर्थ है या नहीं? पार्टी की खामियां गिनाते समय उन्होंने जिस बदलाव की बात की थी क्या वह वाकई उस बदलाव को लाने के लिए गंभीर हैं? वैसे तो वर्ष 1985 में उनके पिता राजीव गांधी ने भी इसी तरह का भाषण दिया था, उन्होंने भी ऐसे ही परिवर्तन लाने की बात कही थी लेकिन जिस बदलाव की बात वो कर रहे थे वह नजर नहीं आया था. हालांकि नई पीढ़ी के हाथ में पार्टी की जिम्मेदारी देते हुए सोच-समझकर कुछ बातों का ध्यान तो जरूर रखा गया होगा. लेकिन राहुल गांधी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण सवाल हमारे सामने उठते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना आवश्यक है, जैसे:


1. क्या वाकई राहुल गांधी 2014 के चुनावों में काँग्रेस की नैया पार लगाने में सफल होंगे?

2. राहुल गांधी ने काँग्रेस के भीतर मौजूद जिन कमियों को उकेरा है, क्या वे उन कमियों को दूर करने में कारगर कदम उठा पाएंगे?

3. क्या माओवाद, भ्रष्टाचार, सुरक्षा तंत्र आदि जैसे उल्लेखनीय और देश के लिए महत्वपूर्ण मसलों की कसौटी पर राहुल गांधी सफल हो पाएंगे?


नोट: उपरोक्त मुद्दे पर आप कमेंट या स्वतंत्र ब्लॉग लिखकर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं.  किंतु इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुंचाते हों.

धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

preeti के द्वारा
January 23, 2013

बस बोलने की ही बातें हैं.. मगरमच्छ के आंसू दिखाने में क्या जाता है  

nitin के द्वारा
January 23, 2013

राहुल गांधी शायद इस बार बदलाव लाने में सफल हो पाएंगे


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