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मदर्स डे(13 मई): मां की ममता का कौन सा एहसास है आपके लिए खास

Posted On: 4 May, 2012 Others में

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मदर्स डे (13 मई, 2012) के उपलक्ष्य में ब्लॉग आमंत्रण

प्रिय पाठकों,


कहते हैं ईश्वर सभी जगह उपस्थित नहीं रह सकता इसीलिए उसने धरती पर मां को भेजा जो हर मुश्किल की घड़ी में हमारे साथ रहती है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसकी मां का होना किसी वरदान से कम नहीं होता। एक बच्चे के लिए उसकी मां की अहमियत दुनिया में सबसे अधिक होती है। वह उसकी पहली दोस्त भी होती है और अध्यापिका भी। आप कहीं भी चले जाएं कितने ही बड़े क्यों ना हो जाएं लेकिन आपको आत्मिक सुकून अपनी मां के साथ ही मिलता है। मां के हाथों का बना सादा सा खाना भी आपका पसंदीदा व्यंजन होता है।


दुनिया की चकाचौंध में हम इस तरह मशगूल हो गए हैं कि बचपन में जिस मां के साथ हमने सबसे ज्यादा समय गुजारा, आत्मनिर्भर होते ही हमारे पास उसके लिए समय ही नहीं बचा। मां से दूर रहना आज बहुत से लोगों के लिए एक मजबूरी बन गई है लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं होता कि कोई बच्चा अपनी मां के प्रेम को नजरअंदाज कर दे।


मां के प्रति आपकी भावनाओं को समझते हुए जागरण जंक्शन मंच अपने सभी सम्मानित ब्लॉगरों को अपनी मां के साथ बिताए उन अनमोल पलों को फिर से जीने का एक मौका दे रहा है। आप ब्लॉग के माध्यम से अन्य पाठकों के साथ मां के साथ बिताए कुछ यादगार लम्हों को साझा कर सकते हैं। अपना ब्लॉग लिखकर आप उन सभी भावनात्मक क्षणों को फिर से महसूस कर सकते हैं।


कुछ ही दिनों में “मदर्स डे” आने वाला है। मां के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने का इससे बेहतर अवसर और क्या हो सकता है। अगर आप भी मां के साथ बिताए उन खट्टे-मीठे पलों को मंच पर मौजूद अन्य पाठकों के साथ बांटना चाहते हैं तो आप मंच पर अपना ब्लॉग लिखकर भूली-बिसरी यादों को फिर से तरोताजा कर सकते हैं। आप चाहे तो अपने दोस्तों या फिर परिचितों से जुड़ी घटनाएं भी लिख सकते हैं।


नोट: अपना ब्लॉग लिखते समय इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुंचाते हों।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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50 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mukesh Giri Goswami के द्वारा
May 13, 2012

माता दिवस अमर रहे… मित्रों आज का दिन माँ के ममता , प्यार को याद करने का प्रतीक दिवस है, मैं अपनी एक कविता माँ के स्नेह को समर्पित करते हुए आप सभी के सामने प्रस्तुत करता हूँ.. इसके पहले मैं एक आग्रह भी करना चाहता हूँ की आप सभी सिर्फ एक दिन मात्र माँ को याद ना करें क्यूँ की माँ कोई भूलने वाली चीज़ नहीं है.. वो तो जीवन के हर पल हर सांस में बसी होती है. “विश्वास रखो माँ” मेरे मासूम चेहरे से कोई, नज़रें हटाते क्यूँ नही ? मेरे बढ़ते हुये किताबों पर, नज़रे डताते क्यूँ नहीं ? किस्से मासूमियत के, आप ही लोग बताते हो ! फिर क्यूँ भविष्य की चिंता, में हमें सताते हो ? मेरे कदमों की लडखडाहट से, घबराते क्यूँ हो ? क्या मैं पहले कभी, चलते समय गिरा नही हूँ ? विश्वास रखो माँ, मेरे कदम लडखडाये कोई बात नहीं ! तेरे विश्वास, तेरे अरमान और मेरे सपने, कभी नहीं लडखडायेंगे ! मुकेश गिरि गोस्वामी हृदयगाथा : मन की बातें

Arvind Kumar के द्वारा
May 13, 2012

तन समर्पित मन समर्पित ,जीवन का हर छन समर्पित सोचता हु ऐ माँ तुझे और क्या दूँ … छीर सिन्धु के तेरे अमृत ने, पोषित किया मेरा ये जीवन तेरे आँचल से महंगा कोइ वस्त्र नहीं, ढक ले जो सारा तन तेरे ममता के सागर सा ,प्यार नहीं पाया कभी ये मन त्याग रत्न के भंडारे में तेरे ,मै हु बस एक भिखारी सोचता हु ऐ माँ तुझे मै क्या दूँ … पकड़ के मेरी नन्ही उंगली ,तुमने ही चलना सिखाया करके पैरो की मालिश, चलने के काबिल बनाया .. . काला टीका लगा के सर पर, दुनिया की नजरो से बचाया कष्ट सहे कितने पर ,गोंद से अपने ना कभी हटाया अब दुनिया के दस्तूर बदल गए ,पर कोई बदल ना तुमको पाया चुका ना पाउ कभी भी,ऐसा है एहसान तुम्हारा सोचता हु फिर भी, ऐ माँ तुम्हे मै क्या दू ..

arti के द्वारा
May 12, 2012

माँ एक ऐसा शब्द है जिसमे पूरा संसार समां जाता है. ये बात पूरी तरह सही है कि भगवन सभी जगह नहीं रह सकते इसीलिए उन्होंने माँ को हर बच्चे के लिए बनाया. माँ और बच्चे का रिश्ता ही सर्वोपरि है. हर किसी कि जिंदगी माँ से ही शुरू होती है और माँ ही हमे सबसे अच्छे तरह समझ सकती है. माँ के महत्त्व को वो सबसे अच्छे तरह जान सकते है जिनकी माँ नहीं होती. माँ भगवान से भी बढ़कर है इसीलिए उन्हे पूजने से पहले हमे अपनी माँ का आशीर्वाद प्राप्त चाहिए, जिससे हम अपनी जिंदगी मई सफल हो सकते है. Love u mom. भले ही ज़ाहिर न karu पर दिल मे आपका स्थान ही सबसे ऊपर है.

BRAJENDRA SINGH GAUR के द्वारा
May 12, 2012

मेरी माँ……………….कोई शब्द नहीं हैं जो उसे पूर्णता से व्यक्त कर पायें। जिसने अपनी मेहनत , लगन और कर्म पर विश्वास कर एक ऐसा मुकाम बनाया जो मेरे लिए और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत है।

maharshi kapoor के द्वारा
May 10, 2012

Dunia Me Maa Se Bara Koi Nahi Hai Maa Ki Jai Ho

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 10, 2012

जे.जे. परिवार को सादर नमस्कार- “जे.जे. तुमने जगा दिया है माँ का प्यार उरों में / ममता की माला में पिरोकर ढाल दिया है सुरों में //

    aryan dixit के द्वारा
    May 10, 2012

    VERY GOOD LINES FOR OUR FAMILY

Kalpana Singh Bhadauria के द्वारा
May 10, 2012

कैसे करूँ व्याख्यान कि माँ कैसी होती है, बस यूँ समझ लो देवी की मूरत जैसी होती है, खुद तो काँटो कि राह पर चलती रहती है, और अपने बच्चो को फूलो कि सेज संजोती है, हजारो कष्टो को सहती है पर उफ़ तक नहीं करती है, पराये दर्द को अपना कर वो मुस्कुराती रहती है, हजारो रिश्तो को खुद से जोड़ती रहती है, ये माँ हमारी इतनी अच्छी क्यो होती है, अब और कैसे करूँ व्याख्यान कि माँ कैसी होती है

shivesh singh rana के द्वारा
May 9, 2012

माँ शब्द ही एक ऐसा अभूतपूर्व एहसास कराता है जिसका और कोई सानी नहीं …. ममतामयी माँ के बारे में संसार के सारे शब्द छोटे पड़ जाते है….तो आप सोच सकते है की वास्तविकता में माँ क्या है …ईश्वर भी माँ के आगे शीष झुकाते है क्योकि वो भी आखिर एक माँ की संतान है …. जब मेरी माँ प्यार की एक थपकी देते हुए मेरे सर पे हाथ फेरती है तो सारी थकान ना जाने कब दूर भाग जाती है…. और जब कहती है बेटा तुमसे हमें बहुत उम्मीदे है …तो सारे गम भुला के मै अपनी माँ को मन ही मन सारे सपने साकार करने का वादा करता हु….क्योकि मै उनके लिए ख़ास हु…और वो मेरे लिए….

pratima shukla के द्वारा
May 9, 2012

माँ ये शब्द ही अपने आप में सम्पूर्ण और महान हैं. कहते भी हैं की एक नारी तभी संपूर्ण होती हैं जब वो माँ बनती हैं माँ जिसके बिना हर कोई अधुरा हैं बच्चा जब पैदा होता है जब वो आखें भी नहीं खोलता हैं तब से लेकर जिंदगी की आखिरी साँस तक एक माँ ही होती हैं जो उन्हें समझती है जब बच्चे बाहर जातें है तो माँ की याद उन्हें सबसे ज्यादा आती है कुकी माँ ही सबसे करीब होती है अपने बच्चो के जब भी हम अकेले या किसी परेशानी में होते हैं तो हम सिर्फ और सिर्फ माँ को याद करते ह हर रिश्ता वक्त के साथ बदल जाते हैं पर माँ का रिश्ता कभी नाहे बाल सकता ,आज में माँ से इतना ही कहूँगी की माँ आप हमेशा मेरे साथ रहना आपका साथ हमेशा मुझे साहस देता हैं जब कभी मुझे डर लगेगा तो मुझे पता ह आप हमेशा मुक्कुरातें हुए मेरे सर पर हाथ रख के मुझे हिम्मत देंगी मैं आपसे बोहोत प्यार करती हु माँ

Pravin Yadav के द्वारा
May 9, 2012

  मॉ का स्थान कोई कभी नहीं ले सकता है क्योंकि मॉ तो मॉ होती है हर एक रिस्ते को यहॉ पर नये रूप में बनाया जा सकता है लेकिन मॉ ही एक ऐसा रिस्ता है जिसे एक बार पाने के बाद बदला नहीं जा सकता है। मॉ से ही दूनियॉ को हम अपनी आखों से देख पाते हैं वहीं आज के समाज में कुछ ऐसी सन्ताने देखने को मिलती है जो बडे होने पर अपने माता पिता से ही कन्नी काट लेते हैं और और उनसे अपना पीछा छुडाने के लिये कही अन्य स्थान पर जाकर रहने लगते हैं लेकिन यहॉ माता पिता से तात्पर्य केवल इतना ही है कि बच्चे के अन्य जगह पर चले जाने के बाद पिता तो बच्चों के तरफ देखना भी पसन्द नहीं करते हैं लेकिन मॉ कि ममता उस समय भी कम नहीं होती है और उस समय भी जब उनके उम्मीदों की बनी झोपडी में बरसात होने पर पानी टपकने लगता है तो भी मॉ को उम्मीद रहती है कि उनका बच्चा आयेगा और उनके दूख के समय में उनका लाडला जिसको खुश रखने के लिए उन लोगों ने कोई कमी नहीं किया और अपने तरफ से जान निकाल कर रख्र दिया। आज मेरा केवल ये कहना है कि मॉ तो मॉ होती है और उनकी भी खुशीओं और भावनाओं का हमें ध्यान रखना चाहिए। प्रवीण यादवʺयशʺ

nikki gupta के द्वारा
May 8, 2012

जो हर कदम पर मुस्कुराती रही जो हर गम गले से लगाती रही अपना हर गम मुझसे छुपाती रही खुद जागकर भी मुझे सुलाती रही मुसीबतों का सामना करती रही जो जिन्दगी की सीढ़ी चड्ती रही जो सुखो और गमो से लडती रही जो मुझे खुश देखकर आगे बडती रही जो जो इस दुनिया में मुझे लायी जिसने सिखाई मुझे आचाई जिसने मेरी हर चोट सहलाई जिसकी हर बात में छिपी है भलाई जिसने दिया मुझे मेरा मन जिसने सिखाई मुझे मेरी जुबान न जाने कितने और थे उसके अरमान पर छोड़ा नहीं उसने अपना ईमान पुछू मुझसे वो मेरी क्या है जीवन का अमृत या मीठी दवा है पीपल की छाव या ठंडी हवा है दामन में जिसके उम्मीद का कारवा है मेरे लिए धरती आसमा है वो कोई और नहीं मेरी माँ है

Jagdeesh के द्वारा
May 8, 2012

माॅ ईश्वर की साक्षात प्रतिनिधि है ।विश्लेषक@याहू.इन ।

ritesh sharma के द्वारा
May 8, 2012

Maa sari duniya is ek shabd se shuru hoti hai aur isi ki chhaon mein admi palta badhta hai. mere liye to itna ehsas bahut kafi hai ke maa ki god mein sari duniya ka sukh mil jata hai par sari duniya maa ki god ka sukh nahin de sakti. ishwar ne duniya to bna di magar insan ko duniya mein maa hi le ke aa sakti hai itna hi nahi khud ishwar ko duniya mein ane ke liye maa chahiye thi tabhi to maa ka rutba ishwar ko bhi manna pada.

pradeep mishra के द्वारा
May 8, 2012

माँ ek aisi bhavana hai jisase badhakar duniya me kuchh bhi nahi hai,ek aisa ehsas hai ki jiske na hone par poori duniya khali si lagti hai, ham kahin bhi rahen lekin lagta hai ki sham ko kisi bhi tarah apne ghar apni माँ ke pas pahuncha jaye. माँ अगर कभी एक – दो दिन ke लिए bahar chali jati है तो ऐसा लगता है की घर में कोई है ही नहीं सभी अपना सा मुंह लिए बैठे रहते हैं, aur जब माँ लौट कर आती हैं तो lagta है की unse क्या-क्या पूंछ liya jay, सभी उनको घेर कर बैठ jate हैं aur unse बातें करना चाहते हैं. हे ishwar माँ hamesha ही हमारे साथ रहती, दूर जाने की soch से hee डर लगता है.

Poojan Agarwal के द्वारा
May 8, 2012

Ma ki hriday ki karuna kaun samajh paya hai. Ye ek aisi chetna hai jise koi aur mahsoos nahi kar sakta hai. Ek yuvti chetna ke dwar ke andar tab hi pravesh karti hai jab wo ma banti hai. Apne bacche ka chehra pratham baar jab ma dekhti hai tab hazaron prakar ke anubhavon ka bandh ekaek uske oopar toot padta hai aur wo jaise bhavnaon ki badh me bah jati hai. Use aisa prateet hota hai mano usne ek aisa nirman karya kiya hai jo koi nahi kar sakta. Uske bacche ki sampoornta kisi aur ke bacche me nahi hai. Manav jati ko uska ye prem vardan hai. Bacche ki pahli muskan, pahle shabd aur pahle kadam ka anubhav ma marte dum tak nahi bhool pati, balki jab chahe use dubara hriday me aubhav kar sakti hai. Bacche bade hokar ma ki tapasya aur sadhna poori kar dete hain.

allindianrightsorganization के द्वारा
May 8, 2012

माँ एक ऐसा शब्द जिसके लिए मानव यह श्रेय नही ले सकता कि उसने इस शब्द को संस्कृति बना कर दुनिया के सामने रखा क्योकि यही एक ऐसा सम्बन्ध है जो प्रकृति प्रदात है और ऐसा कोई भी प्राणी इस प्रथ्वी पर नही है जो यह रिश्ता न निभाता हो और इस रिश्ते का मर्म न जनता हो | चाहे शेर के चंगुल में फंसे आने बच्चे को देख हिरनी का प्रतिरोध हो या फिट एक कुतिया द्वारा उसके बच्चो को छूने भर से किसी भी पर आक्रमण करने चेष्टा , चिडिया द्वारा पाने बच्चो के लिए घोसला बनाना हो या फिर चील से उनकी रक्षा काप्रश्न हो पर इन सब स्थितियो में माँ खुद के जीवन का मोह छोड़ अपने बच्चे के लिए जीना चाहती है | माँ शब्द उतना ही प्राकृतिक है जितना इस धरा के अन्य प्राक्रतिक अवयव | मुझे आज तक नही मालूम कि किसी महिला ने यह चाह हो कि अपनी सुन्दरता के लिए वह जीवन भर कभी माँ होने का सुख ही न प्राप्त करे | जिस सुन्दरता के चलते औरत हमेशा से प्रश्न चिन्ह बनायीं जाती रही है उसी शारीरिक सुन्दरता से ऊपर वह नासर्गिक सुन्दरता को ओढ़ माँ बन्ने का गौरव हासिल करना चाहती है | माँ उन पलो में सबसे अद्वितीय होती है जब वह अमृत वर्षा करके अपने बच्चे का पालन करती है | मेरे जीवन में माँ का एहसास कुछ ऐसा है कि उनको शब्दों में कैसे लिखू पर जैसे जैसे मै पानी पढाई के पायेदान पर चढ़ता गया औरत औरत के जीवन को वैज्ञानिक आधार पर समझा तो माँ के लिए सर झुकता ही चला गया | मै काफी समय बाद जान पाया कि समाज को बच्चे का सुख देने वाली माँ के गर्भाशय को अगर समुचित समय न दिया जाये तो वह अपने स्थान पर पूर्व की तरह नही हो पाता है और उसी बीच अगर वह फिर माँ बन गई तो वही गर्भाशय कभी पूर्ववत हो ही नही पाता और बहार रह जाने के कारण एक माँ को गर्भाशय या सर्विकल कैंसर हो जाता है | हमारे देश में जल्दी जल्दी बच्चे पैदा करने और बेटी से ज्यादा लड़का देने की लालसा में हर साल करीब ९०००० हज़ार महिलाये मर जाती है और ये त्याग किसी इतिहास में नही लिखा जाता \सिर्फ अपनों की ख़ुशी के लिए माँ बनते बनते एक महिला दुनिया छोड़ देती है और हम सब मूक कोई संवेदना नही दिखाते | मुझे काफी देर से अपनी माँ की समस्या का पता चला और भारतीय संस्कृति में माँ के गर्भाशय , जननांग ,से पैदा तो हुआ जा सकता है , माँ के वक्ष से ढूध तो पिया जा सकता है पर उसके शरीर के बारे में चर्चा नही की जा सकती और कर रहे है तो आप के लोगो के साथ उठने बैठने पर संदेह किया जाने लगेगा ऐसे भारत में मुझे लगा कि अगर माँ से बढ़ कर कुछ नही तो मै उनसे बात करूँगा और मैंने की| मेरी माँ को भी अच्छा नही लगा कि मै अपने मुह से ऐसी बात कर रहा हूँ जबकि वह उच्च शिक्षित महिला है पर जब मैंने उनको समझाया तो उनका उत्तर अवाक् करने वाला था | उन्होंने कहा कि मैंने सुना है कि इस आपरेशन में जान जाने का डर रहता है और मै जैसी हूँ थी हूँ कम से कम जब तक जिन्दा हूँ तुम लोगो के साथ तो हूँ और मुझे इस से ज्यादा कुछ नही चाहिए और उन्होंने आपरेशन नही कराया | अब उन्हें चलने में काफी परेशानी होती है पर आज भी उनको पूरी चिंता रहती है कि सबने खाना खा लिया कि नही और सब ठीक है कि नही जबकि उन्ही बच्चो के लिए खद के गले अस्वस्थता लगा ली | अब ऐसी माँ के लिए क्या खु और कैसे खु कि मुझे उनकी किस बात ने प्रभावित किया ? शायद उनका हर त्याग मेरे लिए किसी महापुरुष से कम नही और पूरी पृथ्वी पर उनके बराबर का त्यागी और महापुरुष कोई अत ही नही इससे अपनी माँ की तुलना कर डालू| माँ तुम केवल श्रध्दा हो , पिय्श श्रोत सी भा करो अवनी और अम्बर तल में ……..डॉ आलोक चान्टिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन

    allindianrightsorganization के द्वारा
    May 8, 2012

    पीयूष श्रोत सी बहा करो , अवनी और अम्बरतल में , कृपया इसे सही करके ऊपर पढ़े

Minakshi Pandey के द्वारा
May 8, 2012

MOTHER YOU ARE SO MUCH IMPORTANT FOR US AS WE ARE FOR OUR SELF BECAUSE OUR EXISTENCE IS DUE TO YOU. YOUR PRESENCE MAKE ME OUT OF ALL TROUBLES AND STRESS. YOUR SERVICES ARE PRICELESS BECAUSE NO BODY CAN DO SO MUCH FOR ME UNCONDITIONALLY AND FOREVER. THANK GOD FOR SUCH A MIRACULOUS GIFT IN THIS EARTH.

anuradha goel के द्वारा
May 8, 2012

मां की याद तब बहुत आती है जब वो नानी के घर जाती है।

rupa kumari के द्वारा
May 7, 2012

मे यह तो नही जानती की मॉ से दूर रहना कया है..पर हॉ बचपन से ही उनके  पास रहने के कारन उनके अ्मूलय और सनेहशील साथ का मतलब जरुर समझती हू. शायद मे उनके मातृतव का वण़ॆन उन भारी भरकम शबदौ से न कर पाउ.कयोकी यह असभव है. बस मे यह कहना चाहुगी की मॉ को क़षट देना या उनके पयार को ठुकराना,सवॆग को ठुकराने तथा भगवान को कशट देने के बराबर है।

Shashi Mishra के द्वारा
May 7, 2012

kya khoob likha hai aapne, dil bhar aaya.

Diwakar Pathak के द्वारा
May 7, 2012

Maa……. Sochta hun tera.. Karz kitna bda, Aaj pairon pe main.. hun khada, Kitne dard seh ke, sine se bhar ke, tune mujhko kiya.. hai bda. Maa….. teri hasti bhi mahaan hai….. Tujhme,,, Bhari mamta ki khan hai….

omprakash prajapati के द्वारा
May 7, 2012

माँ के आँचल में दुनिया का प्यार है, माँ के चरणों में संसार है , माँ नहीं तो कुछ नहीं , माँ का दिया ये जीवन, माँ के चरणों में, माँ के लिए तेयार है l

shatabdimukherjee के द्वारा
May 7, 2012

माँ, इस एक शब्द में पूरा संसार समाया, ममता और प्यार से ईश्वर ने तुझे बनाया, देवी का रूप लिए तू साक्षात् माँ. पहली बरसात की सौंधी खुशबु जैसी मां.

Aayush Johri के द्वारा
May 6, 2012

MAA…….har bacche ke muh se pehla shabd yahi nikalta hai. Maa ke sath bitaya hua har ek pal zindagi bhar yad rehta hai. Maa apne bacche ki pehli mitra bhi hoti hai or pehli adhyapika bhi hoti hai. Agar uske bacche ko koi taklif hoti hai to, sabse zyada taklif uss Maa ko hoti hai. Agar baccha bhukha hai to, wo khana khud na khakar, pehle apne bacche ko khilati hai taki uska baccha bhukha na reh jaye. Agar baccha bemaar hai to, wo raat bhar jaagkar apne bacche ki seva karti hai taki uska baccha jaldi thik ho jaye.Maa ko apne bacche ki choti se choti baat par chinta hoti hai. Bacche ko ek cheenk bhi aa jaye to bhi wo vyakul ho uthti hai. Wah re Bhagwan tune kya cheez banayi hai ‘MAA’, jo amulya hai, atulya hai.

Brijesh के द्वारा
May 5, 2012

मां, कितना मीठा, कितना अपना, कितना गहरा और कितना खूबसूरत शब्द है। समूची पृथ्वी पर बस यही एक पावन रिश्ता है जिसमें कोई कपट नहीं होता। कोई प्रदूषण नहीं होता। इस एक रिश्ते में निहित है छलछलाता ममता का सागर। शीतल और सुगंधित बयार का कोमल अहसास। इस रिश्‍ते की गुदगुदाती गोद में ऐसी अव्यक्त अनुभूति छुपी है जैसे हरी, ठंडी व कोमल दूब की बगिया में सोए हों माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक दिवस नहीं एक सदी भ‍ी कम है। किसी ने कहा है ना कि सारे सागर की स्याही बना ली जाए और सारी धरती को कागज मान कर लिखा जाए तब भी मां की महिमा नहीं लिखी जा सकती। इसीलिए हर बच्चा कहता है मेरी मां सबसे अच्छी है। जबकि मां, इसकी- उसकी नहीं हर किसी की अच्छी ही होती है, क्योंकि वह मां होती है। मातृ दिवस पर हर मां को उसके अनूठे अनमोल मातृ-बोध की बधाई।

Brijesh के द्वारा
May 5, 2012

bahut hi achi baat hai aur bahut hai achi pahel hai ye Jagran ki, hum to yeh kahte hai ki her bachhe k liye her din mothers day hona chahiye..

zulfiqar के द्वारा
May 5, 2012

मानव जीवन में माँ का रिश्ता सभी रिश्तों से ऊपर हे , शायद ही कोई मानव ऐसा होगा जो इस रिश्ते के महत्त्व को न समझता हो. परमात्मा ने अपनी उपस्तिथि मानव जीवन में माँ के माद्यम से दरशाई हे. क्यूँ की माँ के प्रेम में सच्चाई और त्याग की भावना समाहित होती हे, जो आजके स्वार्थी युग में एक अनमोल और वांछित भावना हे. आइये इस पावन रिश्ते को हम सभी एक नई दिशा दें.. हम सभी अपनी अपनी माँ को एक खूबसूरत उपहार दें इससे भी बढकर उसे अपने पास होने का एहसास दें …डॉ. ज़ुल्फ़िकार राना,शिक्षक ए.एम् .यूं. अलीगढ

saumitra singh nagvansh के द्वारा
May 5, 2012

मेरा नाम सौमित्र सिंह हैं मै जब तीन महीने का था तब से मै अपनी मां से दूर रह रहा हू और आज मै २४ साल का हो गया हूं! पर आज भी जब मै घर जाता हूं तो मै अपनी मां के हाथ से ही खाना खाता हूं और जब तक घर पर रहता हू ऊन्ही के साथ सोता भी हूं!

INDRAJEET KUMAR के द्वारा
May 5, 2012

मेरी माँ बहुत ही अच्छी हैं क्योकि वो मुझे कभी भी तकलीफ में नहीं देख सकती हैं वो पढ़ी लिखी नहीं हैं पर मेरा हर एक दुःख सुख के बारे में जानती हैं और समझती भी हैं वो मुझसे ये नहीं पूछती हैं की तुम कितना कमाते हो वो सिर्फ यही पूछती हैं तू है कैसा? उसकी अगर बस चले तो हमे कभी दुःख होने न दे ! मैं समझता हु की मेरी माँ सबसे अच्छी हैं वो लोग गलत हैं जो अपनी माँ के बारे में बुरा सोचते हैं और कुछ नहीं कह सकता हु ! इन्द्रजीत कुमार पटना

Sandeep Tyagi के द्वारा
May 5, 2012

Jo humko jeevan deti hai wo maa kahlaati hai Jo paawan sa man deti hai wo maa kahlaati hai Hanste rote uski godi main palte jaate hain Ungli pakad ke uski raaho main chalet jaate hain Jo humko bachpan deti hai wo maa kahlaati hai Jo humko jeevan deti hai wo maa kahlaati hai Jaan se bhi jyada wo pyaar humse karti hai Khudh bhukhi rahke wo pet hamara bharti hai Jo seene mai dhadkan deti hai wo maa kahlaati hai Jo humko jeevan deti hai wo maa kahlaati hai Har khushi apni humpe nishaar kar deti hai Saare gum hamare apne aanchal mai bhar leti hai Ji khushiyo ka saavan deti hai wo maa kahlaati hai Jo humko jeevan deti hai wo maa kahlaati hai Mamta apne seene ki humpe wo lutaati hai Gir jaaye raaho main to maa hi hume uthati hai Ji sacchayi ka darpan deti hai wo maa kahlaati hai Jo humko jeevan deti hai wo maa kahlaati hai

    krishna bhardwaj के द्वारा
    May 6, 2012

    सुन्दर एवं भावपूर्ण कविता के लिए बधाई….

Nazish Khan के द्वारा
May 5, 2012

मेरी माँ ने बचपन से मुझे बहुत प्यार दिया है में किस बात को सबसे ज्यादा अच्छा कहूँ मेरे लिए तो हर काम मेरी माँ से शुरू और मेरी माँ पे ख़तम होता है में अपनी माँ से बहुत प्यार करता हु आई लव माँई मोम जब बचपन में मुझे कोई तकलीफ होती थी तो वो पूरी रात जागती रहती थी की कहीं मुझे किसी चीज़ की ज़रुरत न पड़ जाये में क्या हम में से कोई भी अपने माँ बाप का क़र्ज़ जिंदगी भर नहीं उतार सकते हमे चाहिए की हम सबको अपने माँ बाप को बहुत प्यार देना चाहिए उन्हें हमेशा खुश रखना चाहिए मेरी माँ बहुत अछि हैं में उनसे बहुत प्यार करता हु माँ आज में आपसे वादा करता हूँ की ज़िंदगी में कभी आपको कोई दुःख नहीं दूंगा आपको हर वो ख़ुशी दूंगा जो आपने बचपन से आज तक मुझे दी है आपकी हर तकलीफ को अपना समझूंगा

Krishna Bhardwa के द्वारा
May 4, 2012

चंद चार पल भले हो सोचने को मगर माँ तेरी याद आती है. इन व्यस्त लम्हों के तंग जीवन में जब घनघोर तन्हाई सी छाती है तब माँ मुझको तेरी याद बहुत आती है. चाहे भौतिक सुख वैभव की सम्पन्नता हो, कुछ कर गुजरने की दृढ़ता हो. पर कभी कभी घोर रिक्तता सी मन में छाती है. तब माँ मुझको तेरी बहुत याद आती है. दुनिया में माँ का कोई विकल्प नहीं, माँ की सेवा से सच्चा संकल्प नहीं. वह माँ ही तो है जो हर पल को जीने का एहसास दिलाती है. माँ मुझको तेरी याद बहुत तडपाती है. कष्ट अगर तुझको हो तो मुझको कोई आभाष नहीं होता. कष्ट अगर मुझ पर आये तो तू बैचेन हो जाती है. माँ मुझको तेरी याद बहुत आती है. माँ तू विद्या, और धर्म है तू, मेरे ह्रदय का मर्म है तू. प्रेम,करुणा और दया की मूरत है तू बच्चे अच्छे हो या बुरे सब पर समरसता बरसाती है. माँ मुझको तेरी बहुत याद आती है. जब जीवन पथ में कोई साथ न था. मन में किंचित विश्वास न था. आँखों में सपने टूटे थे, फिर से उठने का साहस न था वह तेरी स्नेहिल करुणा थी जिसने फिर से विश्वास जगाया था. विषम क्षणों मै भी तूने लड़ते रहना सिखलाया था. अब चाहे तू दूर भले ही सही मुझसे पर एक मीठे से स्पर्श का एहसास हर पल दिलाती है. तब माँ मुझको तेरी याद बहुत रुलाती है. पता नहीं क्या मै तेरा ऋण कभी चुका सकूंगा. तेरे वैभव को गिरि-शिखरों से भी ऊँचा उठा सकूंगा. एक बैचेनी सी मन में गहराती है. माँ तेरी याद मुझको बहुत तडपाती है. माँ तू मेरे अंतस की शक्ति है . तेरे चरणों में मेरी अविचल भक्ति है. तेरी ममता ही मुझमे भावुकता लाती है. माँ मुझको तेरी याद बहुत सताती है. दे ऐसा आशीष मुझे माँ, स्वयं काल से भिड जाऊ अटूट लक्ष्य की प्राप्ति हेतु, लड़ते लड़ते आगे जाऊ. इतना आगे इतना आगे जिसका कोई छोर न हो. जहाँ पूर्ण दिव्यता हो, बाधाओं की डोर ना हो. तेरी दिव्य प्रेरणा ही मुझमे शक्ति संचार कराती है. पर माँ मुझको तेरी याद हर पल आती है. तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहे ना रहें. कृष्ण भारद्वाज

    Ramashish Kumar के द्वारा
    May 5, 2012

    कृष्ण जी नमस्कार आप माँ की ममता के बारे में जो कविता लिखे है ओ ओकाई सराहनीय पुर्ड है.आप बहोत ही अच्चा लिखे है,मै इस कविता के लिए आप को बहोत बहोत धन्यवाद देता हूँ.

    Brijesh के द्वारा
    May 5, 2012

    कृष्ण भारद्वाज जी, आपकी कविता बहुत ही सरह्निये है, हमें बहुत ही पसंद आयी, आपको बहुत-बहुत धन्यबाद..

    krishna bhardwaj के द्वारा
    May 6, 2012

    Ramashish ji और brijesh ji को प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यबाद

    UMA SHARMA के द्वारा
    May 6, 2012

    माँ क्या होती है ये कहने की नहीं समझ ने की बात होती मेरी माँ को मुझ से बिछड़े ८ साल हो गए है लेकिन मई उनके कम1 करने के तरीके के कारन हर चन यद् करती हूँ बस माँ तो माँ ही होती है न कम न ज्यादा माँ की कमी को कोई भी पूरा नहीं कर सकता ;

madhup के द्वारा
May 4, 2012

माँ के चरण में है गंतव्य जीवन का है ऐसा ही लय

    aryan dixit के द्वारा
    May 4, 2012

    मधुप जी आपने दो शब्दों में बहुत कुछ कह दिया .

SAMPAT KATARIA के द्वारा
May 4, 2012

जिस्म तो होता है पर जान नही होती ये उनसे पूछो जिनके माँ नही होती

Ramashish Kumar के द्वारा
May 4, 2012

माँ के ममता का हर एहसास खास है माँ के साथ बिताया गया सभी पल एक से बड़कर एक है किसी भी पल को एक सब्द में बाया करना बहोत ही मुस्किल है.माँ की ममता सबसे पहले भीर बाकि बाद में सब है.

Jai Prakash के द्वारा
May 4, 2012

माँ के साथ बिताये पलो को शब्दों में व्यक्त कर पाना मेरे लिए मुश्किल ही नही नामुकिन हैं!

aryan dixit के द्वारा
May 4, 2012

माँ इस संसार का ऐसा सब्द है जो यहाँ पर सबसे पहले आया ॥इन्सान तो इन्सान है पर मैंने पशुओं और पच्चियों में भी ऐसे ममता का अनुभव किया है जो बाकी अद्भुद है.॥ मैं अपने कबिता के कुछ पंक्तिया यहाँ प्रस्तुत करना चाहता हु.ये कबिता उन लोगों के लिए है जो बुजुर्ग ho जाने पर अपने माता पता का सम्मान नहीं करते. की बो रोती रही लेकिन मैं उसको छोड़ आया था . मैं उसके बुदापे की उम्मीद को भी तोड़ आया था उससे दूर जाकर ये ख्याल आया था . की मुघे चलना तो मेरी माँ ने ही सिखाया था ॥ कृपा करके प्रतिक्रिया अबश्य भेजे.

    Jai Prakash के द्वारा
    May 4, 2012

    awesome lines bro…

    aryan dixit के द्वारा
    May 4, 2012

    जय प्रकाश जी प्रतिक्रिया के लिए भोत भोत धन्यवाद .

    Ramashish Kumar के द्वारा
    May 4, 2012

    जय प्रकाश जी कविता के लिए धन्यवाद लेकिन थोड़ी और पक्तियों की जरुरत थी कविता में कुछ लाइन बाद गया होता तो अच्छा होता.

    aryan dixit के द्वारा
    May 4, 2012

    रामाशीष जिए कबिता की चार पंक्तिया मेरी थी जय प्रकाश जी की नहीं ,मैं आपकी प्रतिक्रिया का धयान अबश्य रखुगा .

    Ramashish Kumar के द्वारा
    May 5, 2012

    सॉरी आर्यन सर जी मै ध्यान नहीं दिया और जयप्रकाश जी को समझ गया.मुझे उम्मीद है की आप कविता को और बड़ी पकती में लिखेगे.धन्यवाद आर्यन भाई.


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