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गणतांत्रिक भारत – उम्मीदें और आशाएं !!

Posted On: 18 Jan, 2012 Others में

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सभी सम्मानित पाठकों को गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं


प्रिय पाठकों,


भारत के गौरवमयी इतिहास में 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जो प्रत्येक भारतीय नागरिक को, भले ही वह अपने देश से कितना ही दूर क्यों ना रह रहा हो, अपनी मातृभूमि पर गर्व करने का एक विशेष अवसर प्रदान करता है. एक लंबे समय तक अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी करने के बाद भारत ने स्वतंत्रता हासिल की और 26 जनवरी, 1950 को अपना संविधान लागू कर खुद को गणतंत्र राज्य घोषित कर दिया.


इस वर्ष भारत अपना तिरसठवां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है जिसकी तैयारियां बहुत जोर-शोर और उत्साह के साथ संपन्न की जा रही हैं. लेकिन क्या आपको लगता है गणतंत्र बनने के इतने वर्षों बाद भी भारत अपने गणतांत्रिक स्वरूप और इससे जुड़ी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम बन पाया है? भारतीय पहले से ही नासूर बन चुके भ्रष्टाचार को सहन करने के लिए विवश थे उस पर प्रधानमंत्री ने कुपोषण की बढ़ती दर पर जो बयान दिया है वह एक गंभीर विषय है. विश्व पटल पर भले ही भारत विकासशील राष्ट्रों की श्रेणी में ऊपरी पायदान पर हो लेकिन अंदरूनी हालात आज भी चिंताजनक ही हैं.


जागरण जंक्शन अपने सभी सम्मानित ब्लॉगरों को भारत के वर्तमान हालातों पर अपनी राय रखने के लिए आमंत्रित करता है. बासठ वर्षीय गणतांत्रिक भारत में आज कई ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें नियंत्रित किया जाना बेहद आवश्यक है. आप भी अपना एक ब्लॉग लिखकर अपने सुझावों और गणतंत्र भारत से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभवों को सारी दुनिया के साथ बांट सकते हैं. अपने विचारों को संप्रेषित करने का आपके पास यह एक सुनहरा अवसर है.


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार




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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R.N.Singh के द्वारा
February 10, 2012

महोदय, बड़े दुःख की बात है कि बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 दिनांक 1-4-2010 से पूरे देश में लागू है किन्तु उत्तर प्रदेश में कम्प्यूटर शिक्षा हेतु यह आज तक नहीं लागू है जबकि कम्प्यूटर विषय कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है।उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में कम्प्यूटर शिक्षा पूरी तरह अरबों, खरबोें रूपये के भ्रष्टाचार, अराजकता, कम्प्यूटर शिक्षकों के शोषण तथा सरकारी लूट को समर्पित है। बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 38 के अनुसार उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 बनायी गयी जिसकी धारा 18 ;1द्ध के ;खद्ध में यह स्पष्ट उल्लेख है कि विद्यालय किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह या संगठन के लाभ या किन्हीं अन्य व्यक्तियों के लाभ हेतु संचालित नहीं है। फिर भी कम्पनियों को लाभ पहुॅंचाने के उद्देश्य से सरकारों द्वारा कम्पनियों को कक्षा 6,7 व 8 की कम्प्यूटर शिक्षा ठेके पर दे दी गयी। अनुबन्ध के अनुरूप This Agreement shall be governed by the law of India बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होते ही स्वतः ही शून्य होकर समाप्त हो जाता है। उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 धारा 23;3द्ध के बिन्दु 18 जो शिक्षक जिस विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रहा है उस शिक्षक पर वही वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्ते लागू होंगी और ऐसी सेवा नियमावली से शासित होंगी जैसा कि उस विद्यालय के अन्य शिक्षकों पर लागू होती है। बड़े दुःख की बात है कि उत्तर प्रदेश में कानून एवं लोकतंत्र का राज खत्म करके कम्पनियों को लाभ पहुॅंचाने के उद्देश्य से प्रदेश में बालकों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धाराओं का पालन नहीं किया जा रहा है तथा छात्रों और कम्प्यूटर अध्यापकों का शोषण करके सरकार के पैसे की लूट की जा रही है। आज सभी राजनैतिक पार्टियॉ छात्रों को टेबलेट, लैपटॉप, रोजगार व शिक्षा देने की बात कर रहीं है।यहॉं यह भी विचारणीय है कि छात्रों को टेबलेट, लैपटॉप के बारे में शिक्षा कौन देगा जब कि निरन्तर कम्प्यूटर शिक्षक बेरोजगार होता जा रहा है? युवकों की बेरोजगारी कैसे दूर होगी? अब प्रश्न यह उठता है कि सरकार बनाने वाली पार्टियॉं इस मुद्दे को कितनी गम्भीरता से लेती हैं? प्रश्न यह भी उठता है कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप मंे प्रेस और मीडिया इस मुद्दे को कितनी गम्भीरता से लेते है? क्यों कि कम्प्यूटर शिक्षकों ने पत्र और साक्ष्यों के माध्यम से इस तरफ प्रमुख राजनैतिक पार्टियों, प्रेस एवं मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। हम आशा करते है कि इस मुद्दे पर आप अपनी राय देंगे।

Jamuna के द्वारा
January 20, 2012

बासठ  साल बाद भी देश की सनस्याओं में कमी नहीं आई है. सरकार की बेमानी विकास को कुपोषण ने सामने ला दिया

Tamanna के द्वारा
January 18, 2012

गणतंत्र भारत में जनता के क्या हाल है यह किसी से छुपा नही हैं.


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