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Jagran Junction Blog

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JJ Blog


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Happy Teacher`s Day: जिनकी एक सीख आपके लिए आदर्श बन गई

Posted On: 28 Aug, 2014  
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सोशल इश्यू में

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Happy Independence Day: क्या बदली है तकदीर ‘आजाद’ भारत की !!

Posted On: 8 Aug, 2014  
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Politics में

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त्यौहारों का मौसम है….रौनक तो लगेगी

Posted On: 17 Jul, 2014  
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जनरल डब्बा में

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Happy Father`s Day: ‘पापा’ तुम बहुत स्पेशल हो

Posted On: 12 Jun, 2014  
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मेट्रो लाइफ में

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ब्लॉग आमंत्रण – बचपन की यादें

Posted On: 19 May, 2014  
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मस्ती मालगाड़ी में

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परिणाम – सशक्त नारी को नमन

Posted On: 10 Mar, 2014  
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जनरल डब्बा सोशल इश्यू में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

राजनीति में ईमानदार लोगों की कमी क्यों आज के बच्चो से पूछा जाता हा कि वह क्या बनना चाहता है तो उसका जवाब आता है डॉक्टर, इंजिनीयर, क्रिकेटर, एक्टर लेकीन राजनीति का नाम लेने वाले कोई नहीं ऐसी हालात में राजनीति में ईमानदार लोगों की कमी तो होगी ही। बच्चे को देश का भविष्य कहा जाता है। अगर भविष्य ही राजनीति से पिछा छुड़ाने लगे तो ईमानदार लोगों की कामना करना व्यर्थ है। भारत के जनसंख्यां का 40% युवा है जिसका राजनीति में भागीदारी न के बराबर है। राजनीति में ऐसे लोग ही आ पाते हैं जिनका कहीं न कहीं कनेक्शन होता है राजनीति परिवारों से। जनता भी बीना जांच परख के उम्मीदावार को चुन लेती है। राजनीति पार्टीयों के द्वारा भी साकारात्मक पहल नहीं किया जाता है जिससे नए पीढी वाले लोगों को मौका मील सके और वह ईमानदारी से काम कर सके। पुराने जवाने के सोच भी ईमानदारी से दूर करती है जैसे हमारे घर का विचार होता है सरकारी नोकड़ी करो, अलगी कमाई कितना है इन बोतों से भी लोगों के मन पहले से विचार आ जाती है कि जहां अलगी कमाई है वहीं नोकड़ी किया जाय। सभ्य समाज के मन में भी यह बैठा हुआ है कि राजनीति बहुत गंदा होता है या यह कहा जा सकता है कि राजनीति में अच्छे लोगों की जगह नहीं है।ऐसा कोई संस्था भी नहीं है जो राजनीति को बढ़ावा दे और युवाओं को राजनीति में केरियर बनाने के लिए प्रोत्साहन दे। आज हमारी सभ्य समाज जो दूर हो गई है राजनीति मंच से उसे जरूरत है राजनीति में जूड़नें की ताकि देश की सत्ता सही लोगों के पास आऐ और देश का सतत विकास हो सके। राजनीति पार्टीयों को भी जरूरत है कि वह सच्चे उम्मिदवार का चयन करे। शिक्षन संसथान को भी चाहिए कि वह छात्र प्रोत्साहित करे कि राजनीति कोई गंदा कार्य नही बल्कि इसमें भी ईमानदारी आ सकती है और कैरियर बनाया जा सकता है।

के द्वारा:

खानदानी राजनीति परिवर्तन संसार का नियम है यह कथन आज के युग में धूमिल होती दिख रही है। मैं बात कर रहा हूं राजनीति परिवेश में अपनों की राजनीति का। इतिहास गवाह है कि अति कुछ भी हमें प्रकृति (प्रकृति) और समाज से दूर करती है। चाहे विश्वयुद्ध हो, केदार नाथ त्रासदी हो या कश्मीर का जल प्रलय। अति युद्ध ने विश्वयुद्ध का रूप लिया तो अति प्रकृति से छेड़छाड़ केदार नाथ और कश्मीर जल प्रलय का। अब लगने लगा है कि अगली बारी राजनीति की है। हमारा भारत 1947 के बाद से आज तक राजनीति अपनों का हस्तक्षेप जैसी बीमारी से जूझ रहा हैं। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बाद उनके ही परिवार से लगभग सभी ने भारतीय राजनीति की बागडोर संभाले और जनता की सेवा में तत्पर रहे। वहीं अन्य पार्टियां भी इससे अछूते नहीं रहे जैसे- मुलायम सिंह यादव( अखिलेश), लालू यादव(राबड़ी देवी, साधु यादव और मिशा भारती), रामविलास पासवान(चिराग पासवान)। इस प्रकार की राजनीति में पार्टी ऐसे उम्मीदवार को टिकट देती है जो उसका अपना है और जीतने के बाद उससे वही करवाता है जो पार्टी चाहती है जिस तरह इतिहास में प्रथम साशक द्वितिय साशक कह कर पुकारा जाता था आज अगर इस प्रकार की बात की जाए तो कहना गलत नहीं होगा। जनता भी ऐसे उम्मीदवार को आसानी से चुन लेती है उन्हें लगता है कि इसके अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। अपनों की राजनीति से भारत के दक्षिण भाग भी अछुता नहीं रहा है, बल्कि वहां भी खानदानी राजनीति प्रचलन में आ गया है। इस पारिवारिक हस्तक्षेप से न सिर्फ हमारे देश की प्रगति रूक रही है बल्कि राजनीतिक परिवेश में भी भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है। जनता को भी लगने लगा है कि अब इसमें परिवर्तन होना चाहिए जिसका ताजा उदाहरण 16वीं लोकसभा चुनाव है जहां वर्तमान सरकार ने पारिवारिक राजनीति को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड बहुमत हासिल किया। आज देश को जरूरत है स्वच्छ राजनीति की न कि अपनों की राजनीति की। अगर राजनीति को प्रलय से बचाना है तो देश की जनता स्वच्छ छवी वाले उम्मीदावार जो अपनों की राजनीति नहीं जनता की राजनीति करें ऐसे उम्मीदवार को लाना होगा क्योंकि परवर्तन संसार का नियम है और राजनीति को इसकी जरूरत है।

के द्वारा:

के द्वारा:

के द्वारा:

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार ! सादर हरिस्मरण ! महोदय आपसे निवेदन है कि हिंदी दिवस पर किसी प्रतियोगिता का आयोजन करें अथवा इससे संबंधित ब्लॉग लिखने के लिए ब्लागरों को आमंत्रित करें ! इस बार हिंदी दिवस पर आपने ब्लॉग लेखन का कोई आयोजन करने में में अबतक रूचि कोई नहीं ली है,ये बहुत दुखद है ! इस समय मोदी जी की हिंदी प्रेमी सरकार है ! ब्लागरों के अच्छे सुझाव उन तक पहुँचते तो शायद उनपर अमल भी होता ! आपसे एक बड़ी चूक हो रही है ! हिंदी दिवस पर देर से ही सही,परन्तु अब भी तत्काल किसी आयोजन की घोषणा करें ! आपसे एक और निवेदन है कि जागरण जंक्शन मंच के फीडबैक को प्रतिदिन देखने के लिए किसी को नियुक्त करें ! यहांपर ब्लागरों की समस्यायों को पढ़ने और जबाब देने वाला कोई नहीं है ! वरिष्ठ ब्लागरों को परेशान देखकर मुझे बहुत दुःख होता है ! वे लोग इस मंच की शोभा हैं ! इस मंच की बौद्धिक सम्पदा हैं ! ये मंच उन्ही के कारण प्रतिष्ठित और अनुपम बना हुआ है ! कृपया फीडबैक को सक्रीय करने की तरफ तुरंत ध्यान दें ! ह्रदय से आभार और धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: चित्रकुमार गुप्ता चित्रकुमार गुप्ता

आदरणीय वरिष्ठ संपादक जी नमस्कार, यूँ तो मैं जागरण जंक्शन से अभी अभी जुड़ा हूँ| देखा कि बहुत से रचनाकार आपके समाचार पत्र के माध्यम से हिंदी साहित्य कि सेवा से जुड़े हुए हैं| मेरा एक सुझाव है| अगर संभव हो तो कम से कम वर्ष में एक बार चुनिंदा लेखकों को एक मंच पर एकत्र किया जाए और उनके प्रयासों के आधार पर सम्मानित भी किया जाये |केवल एक प्रशस्ति पत्र ही सही| एक तो सभी लेखकों को एक दूसरे के रूबरू होने का अवसर मिल जायेगा दूसरे उनकी श्रेष्ठ रचनाओं को उनकी जुबानी भी सुना जा सकता है| मुझे लगता है सभी को अच्छा भी लगेगा| अगर धन कि समस्या हो तो शायद कोई प्रायोजक भी मिल सकता है नहीं तो कोई अन्य समाधान निकाला जा सकता है| दैनिक जागरण की प्रतिष्ठा में भी बढ़ोतरी होगी ऐसा मेरा विश्वास है| धन्यवाद भगवान दास मेहँदीरत्ता गुड़गांव|

के द्वारा: bhagwandassmendiratta bhagwandassmendiratta

मतदाओं को रिझाने सामूहिक भोज * आचार संहिता का खुला उल्लंघन * परिवहन मंत्री भी रहे मौजूद कटनी। उपचुनाव में सत्तारूढ़ दल सत्ता का र्दुउपयोग कर किस कदर अचार संहिता की धज्जियां उड़ाते है इसका ताजा उदाहरण शुक्रवार को बहोरीबंद विधानसभा के ग्राम पंचायत कौडिय़ा में देखने मिला। यहां आयोजित भाजपा का सेक्टर सम्मेलन न केवल स्कूल में आयोजित किया गया बल्कि परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह और भाजपा प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन की मौजूदगी में कई ग्रामों से लाए गए हजारों मतदाताओं और उनके बच्चों को सामूहिक भोज कराया गया। हासिल जानकारी के अनुसार बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कौडिय़ा में स्वतंत्रता दिवस की आड़ में भाजपा के उपचुनाव के उम्मीदवार प्रणय पांडेय द्वारा ग्राम पंचायत कौडिय़ा में भाजपा का सेक्टर सम्मेलन आयोजित किया गया। कौडिय़ा के हायर सेकेण्डरी स्कूल में आयोजित इस सम्मेलन में बसों और अन्य साधनों से कई ग्रामों के हजारों मतदाताओं को लाया गया। प्रदेश के परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह और भाजपा प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मेनन सहित कई दिग्गजों की मौजूदगी में आयोजित उक्त सम्मेलन में एक तरफ जहां मतदाताओं को लोकलुभावन सपने दिखाए गए वहीं दूसरी ओर मतदाताओं को रिझाने और भाजपा के उम्मीदवार को जीताने के हर संभव प्रयास किए गए। इसी कड़ी में कार्यक्रम समाप्ति के उपरांत दिग्गजों की मौजूदगी में मंच के बगल और पंडाल में बकायदा लोगों को बैठाकर सामूहिक रूप से शानदार भोजन कराया गया। इस भोज में कौडिय़ा के अलावा आस पास के कई ग्रामों के हजारों मतदाताओं सहित बड़ी संख्या में महिलायें और बच्चों ने देर रात तक भोजन ग्रहण किया। मौके पर मौजूद पत्रकारों ने जब परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह से सामूहिक भोज और आचार संहिता के उल्लंघन के बारे में सवाल किया तो पहले तो उन्होंने ऐसे किसी आयोजन से इंकार कर दिया और बाद में बड़ी आसानी से सबकुछ नजरअंदाज करने की बात कहकर समस्त दिग्गजों सहित मौके से कन्नी काट गए। 09425465014

के द्वारा:

clash of clans hackWhen I originally commented I clicked the -Notify me when new comments are added- checkbox and now each time a comment is added I get four emails with the same commentclash of clans hack Is there any way you can remove me from that service? Thanks!

के द्वारा:

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के द्वारा:

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के द्वारा:

राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान . जब भारतीय ऋषियों ने अथर्ववेद में ‘माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः’ (अर्थात भूमि मेरी माता है और हम इस धरा के पुत्र हैं।) की प्रतिष्ठा की तभी सम्पूर्ण विश्व में नारी-महिमा का उद्घोष हो गया था। नेपोलियन बोनापार्ट ने नारी की महत्ता को बताते हुए कहा था कि -‘‘ मुझे एक योग्य माता दे दो, मैं तुमको एक योग्य राष्ट्र दूँगा।’’ भारतीय जन-जीवन की मूल धुरी नारी (माता) है। यदि यह कहा जाय कि संस्कृति, परम्परा या धरोहर नारी के कारण ही पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तान्तरित होती रही है, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। जब-जब समाज में जड़ता आयी है नारी शक्ति ने ही उसे जगाने के लिए, उससे जूझने के लिए अपनी सन्तति को तैयार करके, आगे बढ़ने का संकल्प दिया है। कौन भूल सकता है माता जीजाबाई को, जिसकी शिक्षा-दीक्षा ने शिवाजी को महान देशभक्त और कुशल योद्धा बनाया। कौन भूल सकता है पन्ना धाय के बलिदान को पन्नाधाय का उत्कृष्ट त्याग एवं आदर्श इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। वह उच्च कोटि की कत्र्तव्य परायणता थी। अपने बच्चे का बलिदान देकर राजकुमार का जीवन बचाना सामान्य कार्य नहीं। हाड़ी रानी के त्याग एवं बलिदान की कहानी तो भारत के घर-घर में गायी जाती है। रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुल्ताना, पद्मिनी और मीरा के शौर्य एवं जौहर एवं भक्ति ने मध्यकाल की विकट परिस्थितियों में भी अपनी सुकीर्ति का झण्डा फहराया। कैसे कोई स्मरण न करे उस विद्यावती का जिसका पुत्र फाँसी के तख्ते पर खड़ा था और माँ की आँखों में आँसू देखकर पत्रकारों ने पूछा कि एक शहीद की माँ होकर आप रो रही हैं तो विद्यावती का उत्तर था कि ‘‘ मैं अपने पुत्र की शहीदी पर नहीं रो रही, कदाचित् अपनी कोख पर रो रही हूँ कि काश मेरी कोख ने एक और भगत सिंह पैदा किया होता, तो मैं उसे भी देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर देती।’’ ऐसा था भारतीय माताओं का आदर्श। ऐसी थी उनकी राष्ट्र के प्रति निष्ठा। परिवार के केन्द्र में नारी है। परिवार के सारे घटक उसी के चतुर्दिक घूमते हैं, वहीं पोषण पाते हैं और विश्राम। वही सबको एक माला में पिरोये रखने का प्रयास करती है। किसी भी समाज का स्वरूप वहाँ की नारी की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि उसकी स्थिति सुदृढ़ एवं सम्मानजनक है तो समाज भी सुदृढ़ एवं मजबूत होगा। भारतीय महिला सृष्टि के आरंभ से अनन्त गुणों की आगार रही है। पृथ्वी की सी सहनशीलता, सूर्य जैसा तेज, समुद्र की गम्भीरता, पुष्पों जैसा मोहक सौन्दर्य, कोमलता और चन्द्रमा जैसी शीतलता महिला में विद्यमान है। वह दया, करूणा, ममता, सहिष्णुता और प्रेम की पवित्र मूर्ति है। नारी का त्याग और बलिदान भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है। बाल्यावस्था से लेकर मृत्युपर्यन्त वह हमारी संरक्षिका बनी रहती है । सीता, सावित्री, गार्गी, मैत्रेयी जैसी महान् नारियों ने इस देश को अलंकृत किया है। निश्चित ही महिला इस सृष्टि की सबसे सुन्दर कृति तो है ही, साथ ही एक समर्थ अस्तित्व भी है। वह जननी है, अतः मातृत्व महिमा से मंडित है। वह सहचरी है, इसलिए अद्र्धांगिनी के सौभाग्य से शृंगारित है। वह गृहस्वामिनी है, इसलिए अन्नपूर्णा के ऐश्वर्य से अलंकृत है। वह शिशु की प्रथम शिक्षिका है, इसलिए गुरु की गरिमा से गौरवान्वित है। महिला घर, समाज और राष्ट्र का आदर्श है। कोई पुण्य कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान, निर्माण आदि महिला के बिना पूर्ण नहीं होता है। सशक्त महिला सशक्त समाज की आधारशिला है। महिला सृष्टि का उत्सव, मानव की जननी, बालक की पहली गुरु तथा पुरूष की प्रेरणा है। यदि महिला को श्रद्धा की भावना अर्पित की जाए तो वह विश्व के कण-कण को स्वर्गिक भावनाओं से ओतप्रोत कर सकती है। महिला एक सनातन शक्ति है। वह आदिकाल से उन सामाजिक दायित्वों को अपने कन्धों पर उठाए आ रही है, जिन्हंे अगर पुरुषों के कन्धे पर डाल दिया गया होता, तो वह कब का लड़खड़ा गया होता। पुरातन कालीन भारत में महिलाओं को उच्च स्थान प्राप्त था। पुरूषों के समान ही उन्हें सामाजिक, राजनैतिक एवं धार्मिक कृत्यों में भाग लेने का अधिकार था। वे रणक्षेत्र में भी पति को सहयोग देती थी। देवासुर संग्राम में कैकेयी ने अपने अद्वितीय रणकौशल से महाराज दशरथ को चकित कर दिया था। याज्ञवल्क्य की सहधर्मिणी गार्गी ने आध्यात्मिक धन के समक्ष सांसारिक धन तुच्छ है, सिद्ध करके समाज में अपना आदरणीय स्थान प्राप्त किया था। विद्योत्तमा की भूमिका सराहनीय है, जिसने कालिदास को संस्कृत का प्रकाण्ड पंडित बनाने में सफलता प्राप्त की। तुलसीदास जी के जीवन को आध्यात्मिक चेतना देने में उनकी पत्नी का ही बुद्धि चातुर्य था। मिथिला के महापंडित मंडनमिश्र की धर्मपत्नी विदुषी भारती ने शंकराचार्य जैसे महाज्ञानी व्यक्तित्व को भी शास्त्रार्थ में पराजित किया था। लेकिन चूँकि भारत के अस्सी प्रतिशत से अधिक तथाकथित विद्वान गौतमबुद्धोत्तरकालीन भारत को ही जानते पहचानते हैं और उनमें भी प्रतिष्ठा की धुरी पर बैठे लोग, पाश्चात्य विद्वानों द्वारा अंग्रेजी में लिखे गं्रथों से ही, भारत का अनुभव एवं मूल्यांकन करते हैं, अतः नारी विषयक आर्ष-अवधारणा तक वे पहुँच ही नहीं पाते। उन्हें केवल वह नारी दिखाई पड़ती है जिसे देवदासी बनने को बाध्य किया जाता था, जो नगरवधू बनती थी अथवा विषकन्या के रूप में प्रयुक्त की जाती थी। महिमामयी नारी के इन संकीर्ण रूपों से इंकार तो नहीं किया जा सकता। परंतु हमें यह समझना चाहिए कि वे नारी के संकटकालीन रूप थे, शाश्वत नहीं । हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि रोमन साम्राज्य (इसाई जगत, इस्लाम जगत) तथा अन्यान्य प्राचीन संस्कृतियों में नारी की जो अवमानना, दुर्दशा एवं लांछना हुई है- जिसके प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, वैसा भारतवर्ष मंे कम से कम, मालवेश्वर भोजदेव के शासन काल तक कभी नहीं हुआ। इस्लामिक आक्रमणों के अनन्तर भारत का सारा परिदृश्य ही बदल गया। मलिक काफूर, अलाउद्दीन तथा औरंगजेब-सरीखे आततायियों ने तो मनुष्यता की परिभाषा को ही झुठला दिया। सल्तनत-काल के इसी नैतिकता-विहीन वातावरण में नारियों के साथ भी अपरिमित अत्याचार हुए। उसके पास विजेता की भोग्या बन जाने अथवा आत्मघात कर लेने के अतिरिक्त और उपाय ही क्या था? फलतः असहाय नारियाँ आक्रांताओं की भोग्या बनती रही। लेकिन यह ध्यान रहे कि यह भारत की पराधीनता के काल थे, स्वाधीनता के नहीं। अब हम स्वतंत्रता आंदोलन के कालखंड को देखें तो हम देखते हैं कि भारत के स्वतंत्रता-संग्राम में महिलाओं ने जितनी बड़ी संख्या में भाग लिया, उससे सिद्ध होता है कि समय आने पर महिलाएँ प्रेम की पुकार को विद्रोह की हुंकार में तब्दील कर राष्ट्रीय अखण्डता को अक्षुण्ण बनाने में अपना सर्वस्व समर्पित कर सकती हैं। रानी लक्ष्मीबाई, सरोजनी नायडू, मादाम भिखाजी कामा, अरुणा आसफ अली, एनी-बेसेन्ट, भगिनी निवेदिता, सुचेता कृपलानी, कैप्टन लक्ष्मी सहगल, दुर्गा भाभी एवं क्रांतिकारियों को सहयोग देने वाली अनेक महिलाएँ भारत में अवतरित हुईं, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। इतिहास साक्षी है जब-जब समाज या राष्ट्र ने नारी को अवसर तथा अधिकार दिया है, तब-तब नारी ने विश्व के समक्ष श्रेष्ठ उदाहरण ही प्रस्तुत किया है। मैत्रेयी, गार्गी, विश्ववारा, घोषा, अपाला, विदुषी भारती आदि विदुषी स्त्रियाँ शिक्षा के क्षेत्र में अपने बहुमूल्य योगदान के लिए आज भी पूजनीय हैं। आधुनिक काल में महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चैहान, महाश्वेता देवी, अमृता प्रीतम आदि स्त्रियों ने साहित्य तथा राष्ट्र की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। कला के क्षेत्र में लता मंगेश्कर, देविका रानी, वैजयन्ती माला, सोनाल मानसिंह आदि का योगदान वास्तव मे प्रशंसनीय है। वर्तमान में महिलाएँ समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र-उत्थान के अनेक कार्यों में लगी हैं। महिलाओं ने अपनी कर्तव्य परायणता से यह सिद्ध किया है कि वे किसी भी स्तर पर पुरूषों से कम नहीं हैं। बल्कि उन्होंने तो राष्ट्र निर्माण में अपनी श्रेष्ठता ही प्रदर्शित की है। शारीरिक एवं मानसिक कोमलता के कारण महिलाओं को रक्षा सम्बन्धी सेवाओं के उपयुक्त नहीं माना जाता था, किंतु भारत की पहली महिला ‘आई0पी0एस0’ श्रीमती किरण बेदी ने ही अपनी कर्तव्यनिष्ठा से इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया। अत्यंत ही हर्ष का विषय है, कि अब महिला जगत का बहुत बड़ा भाग अपनी संवादहीनता, भीरूता एवं संकोचशीलता से मुक्त होकर सुदृढ़ समाज के सृजन में अपनी भागीदारी के लिए प्रस्तुत है। समस्त सामाजिक संदर्भों से जुड़ी महिलाओं की सक्रियता को अब न केवल पुरूष वरन् परिवार, समाज एवं राष्ट्र ने भी सगर्व स्वीकारा है। वर्तमान में नारी शक्ति का फैलाव इतना घनीभूत हो गया है कि कोई भी क्षेत्र इनके सम्पर्क से अछूता नहीं है। आज नारी पुरूषों के समान ही सुशिक्षित, सक्षम एवं सफल है। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, साहित्य, चिकित्सा, सेना, पुलिस, प्रशासन, व्यापार, समाज सुधार, पत्रकारिता, मीडिया एवं कला का क्षेत्र हो, नारी की उपस्थिति, योग्यता एवं उपलब्धियाँ स्वयं अपना प्रत्यक्ष परिचय प्रस्तुत कर रही है। घर परिवार से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक उसकी कृति पताका लहरा रही है। दोहरे दायित्वों से लदी महिलाओं ने अपनी दोगुनी शक्ति का प्रदर्शन कर सिद्ध कर दिया है कि समाज की उन्नति आज केवल पुरूषों के कन्धे पर नहीं, अपितु उनके हाथों का सहारा लेकर भी ऊँचाईयों की ओर अग्रसर होती है। उन्नत राष्ट्र की कल्पना तभी यथार्थ का रूप धारण कर सकती है, जब महिला सशक्त होकर राष्ट्र को सशक्त करें। महिला स्वयं सिद्धा है, वह गुणों की सम्पदा हैं। आवश्यकता है इन शक्तियों को महज प्रोत्साहन देने की। यही समय की माँग है। नाम -गुंजेश गौतम झा राजनीति विज्ञान विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी- 221005, उ0 प्र0 सम्पर्क:- 09026028080

के द्वारा:

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

कहा खो गया वो वक्त.....13911 कहा खो गया वो वक्त... जब खुषियों की कीमत मा के चेहरे से लग जाती थी आसू उसकी आख से टपकता था औ फफोले औलाद के दिल के फूट पडते थे कहा खो गया वो वक्त... जब जरूरत से ज्यादा मा का लाड अहसास करा जाता था औलाद को कि...कहीं कोर्इ गम है जो वो छिपा रही है प्यार की आड में कहा खो गया....... जब जरूरते एक दूसरे की समझ ली जाती थी खामोष रहकर भी संसकारो और समझ का दूध जब रगों में दौडता था लहू बनकर कहा खो गया वो वक्त..... अब औलाद को मा नजर नही आती नजर आता है बस एक जरिया अपनी ख्वाहिषों को पूरा करने का अपने चेहरे की हसी बनाये रखने का फिर चाहे उसके लिये— मा का चेहरा आसूओं से तर ही क्येां न हो जाये। वक्त इतना कैसे बदल गया...... क्या दूध ने रगो में जाकर खून बनाना छोड दिया क्या ममत्व की परिभाशा में दर्द का समावेष धट गया क्या ख्वाहिषों के कद रिष्तों से उचे हो गये क्या आधुनिकता ने मा के अधिकारों का दायरा धटा दिया। कहा खों गया वो वक्त..... क्यों नही लौट आते वो भटके हुए बच्चे अपनी मा की गोद तक क्येां नहीं संसार को एक बार उसकी नजरो से देखते क्येां जिंदगी को समझते नही वो मा बाप की दी सौगात क्यों इक बार वो उसे पूजते नही भगवान मान कर.... कहा खो गया वो वक्त..... वंदना गोयल,फरीदाबाद।

के द्वारा:

कभी थकते नही देखा.............4711 मैंने उसे.... मूह अंधेरे उठ गृहस्थ की चक्की में खुद को रात ढले तक पीसते देखा है। पर......... कभी थकते नहीं देखा थकान चाहे तन की हो या मन की... आचल से पसीने की तरह पौंछ उतार फेेंकती वो..... मुस्कराहटों में छिपा लेती अपना हर दर्द पर....... खुद को कभी थकने नहीं देती चूल्हे की आग हमेषा गर्म ही रखती वो,ये सोच कि कहीं.... भूख से बिलबिलाते बच्चे तडप न उठे ठंडा चूल्हा देख। वो......जानती है कैसे बहलाया जाता है उन दूधमूहे बच्चों को खाली बोतल दे....जबकि खुद के जिस्म में खू दूध न बनाता हों। वो.....मा है ....जो सिर्फ और सिर्फ करना जानती है न रूकना जानती है न थकना जानती है। वंदना गोयल, फरीदाबाद ये सच

के द्वारा:

कहा खो गयी औरत......22113 मेरा मुझमें कुछ भी नहीं मैं खुद में कुछ भी नहीं मैं कल भी नहीं थी मैं आज भी नहीं हू मैं कल भी कठपुतली थी मैं आज भी कठपुतली हू कल मा बाबा के इषारे पर नाचती थी आज पति और बच्चों के इषारों पर..... कुछ भी ,कभी भी कोषिष भी नहीं हुर्इ कुछ बदलने की...कुछ सोचने की सब जस का तस है.... परिवर्तन संसार का नियम हेै..सुना था पर देखा नहीं...... विज्ञान ने तरक्की की....चाद पर पहूच गया इंसान पर समाज कहा बदला..... सोच कहा बदली...? औरत .....कल भी औरत थी औरत ....आज भी औरत है दबी हुर्इ,सहमी हुर्इ, सुकचायी सी, लजायी सी। उसकी पंसद कुछ भी नही..... पति की पंसद ...उसकी पंसद बच्चों की हसी...उसकी हसी सास ससुर के षब्द उसका धर्म। उसमें अपना कुछ भी नहीं.... वो जीये तो परिवार के लिये.... वो सोचे तो अपने संसार के लिये... वो हसे...ताकि धर में खुषी रह सके वो रो नहीं सकती..... क्यों...? उसका रोना परिवार में अषांति लाता है उसका रोना...बच्चो को थोडा सा भावुक कर जाता है उसका रोना..पति को कभी कभी सोचने पर मजबूर कर देता है उसका रोना...कहीं न कहीें सवाल पैदा करता है इसलिये... वो रो भी नही सकती वो खुलकर हस भी नहीं सकती...... कि..... उसका जरूरत से ज्यादा खिखिलाना, मुस्क्राना सबके दिलों में भ्रम पैदा करता है ऐसा क्या पा लिया उसने.....कि.....वो.... औरत होके खिखिला रही है हजार गम है उसके पास फिर भी मुस्क्रा रही है वो ऐसी क्यों होती जा रही है। वो सच में कहीं बदल तो नहीं रही... सवालों के ये जाल उसपर हमेषा डलते रहे है। वो चाहे तो भी उससे निकल नहीं सकती वो औरत होने के अर्थ को जानती है वो औरत होने के अर्थ को जी रही है वो पी रही है उस दर्द को जो मिला है उसे, उस जन्म में औरत होने के साथ— पर.... वो धीरे धीरे बदल भी रही है एक हल्की सी करवट... एक हल्की सी चरमराहट....... एक हल्की सी दस्तक..... एक हल्की सी सुगबुगाहट.... डसके अंर्तमन में कहीं हो तो रही है.... वे औरत अब बदल भी रही है... बदल भी रही है...... व्ांदना मोदी गोयल

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का भूले जाते हो - Pasted from एक अहसास -पहले प्यार के नाम -- इक रूमानियत सी जहन पे तारी है ,सपनों की दुनिया में जी रही हूँ मैं  सीने में इक हूक सी उठती है कभी- तो लगता है कि जैसे तेरा खयाल आ गया ; इक उलझन सी है खायालों में ,इक ख़लिश सी जगी है सीने में ; इस उलझन ,इस ख़लिश को नाम दूँ तो क्या -? निगाह तेरी खयालात भी तेरे हैं ---- चाहती हूँ कि न देखूँ तेरी जानिब ,मगर मुश्किल है -- जब भी कुछ सरगोशी सी होती है ,तो लगता है कि तू आ गया  नही होता है जब तू मेरे आसपास ,निगाहों को तलाश रहती है तेरी  और जब होता है मेरे सामने ,निगाहें क्यों झुकी सी जाती हैं -? पलकों में तेरे सपने और दिल को तेरी चाहत है ज़रूर, ज़िंदगी भर हमसफर बन के चलने का खयाल भी है साथ-साथ ; कितना मुश्किल है ;उफ --ये दिल को समझा पाना कि ;सब्र कर -- इस वक़्त तो ;सिर्फ = रूमानियत सी ज़हन पे तारी है और सपनों कि दुनिया में जी रही हूँ मैं ।

के द्वारा: kavita1980 kavita1980

हुआ था प्यार मुझको भी एक तितली से एक बार उसके रंग बिरंगे आयामो से उसके घूमते फिरते रूपो से चाहत थी उसे दिल के गुलदस्ते में सजाने की चाहत थी उसे अपना वैलेंटाइन बनाने की पर तितली को तो उड़ना ही मंजूर था एक डाल से दूसरी डाल पर फूलो से फूलो तक भंवरो के साथ इठलाने को सो हमको छोड़ दिया उसने पतझड़न मे मुरझाने को कुछ कहना था सायद उससे कुछ सुनना था सायद उससे पर वो वहाँ नही थी कहने सुनाने को उड़कर एक डाली से दूसरी पर बैठ गयी वो इतराकर हॅस कर देखा मेरी तरफ एक बार पंखो को फड़फड़ाकर झर रहे थे मोती वंहा पर उसके चारो तरफ इतराकर हाल मेरा था जुदा कुछ इश्क़ में उसके खुद को दफना कर हुआ था प्यार मुझको भी मेरी अंजुमन के आसियंा पर

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          -दो पल-- राह में दो पल साथ तुम्हारे, बीते उनको ढूढ रहा हूँ | पल में सारा जीवन जीकर, फिर वो जीवन ढूंढ रहा हूँ | उन दो पल के साथ ने मेरा, सारा जीवन बदल दिया था | नाम पता कुछ पास नहीं पर, हर पल तुमको ढूंढ रहा हूँ | तेरी चपल सुहानी बातें, मेरे मन की रीति बन गयीं | तेरे सुमधुर स्वर की सरगम, जीवन का संगीत बन गयीं | तुम दो पल जो साथ चल लिए, जीवन की इस कठिन डगर में । मूक साक्षी बनीं जो राहें , उन राहों को ढूंढ रहा हूँ | पल दो पल में जाने कितनी, जीवन-जग की बात होगई | हम तो चुप-चुप ही बैठे थे, बात बात में बात होगई | कैसे पहचानूंगा तुमको, मुलाक़ात यदि कभी होगई | तिरछी चितवन और तेरा, मुस्काता आनन् ढूंढ रहा हूँ | मेरे गीतों को सुनकर, वो तेरा वंदन ढूंढ रहा हूँ | चलते -चलते तेरा वो, प्यारा अभिनन्दन ढूंढ रहा हूँ |                                     ----- डा श्याम गुप्त ..

के द्वारा: drshyamgupta drshyamgupta

पुलकित मन का कोना कोना, दिल की क्यारी पुष्पित है. अधर मौन हैं लेकिन फिर भी प्रेम तुम्हारा मुखरित है. मिलन तुम्हारा सुखद मनोरम लगता मुझे कुदरती है, धड़कन भी तुम पर न्योछावर हरपल मिटती मरती है, गति तुमसे ही है साँसों की, जीवन तुम्हें समर्पित है, अधर मौन हैं लेकिन फिर भी प्रेम तुम्हारा मुखरित है. चहक उठा है सूना आँगन, महक उठी हैं दीवारें, खुशियों की भर भर भेजी हैं, बसंत ऋतु ने उपहारें, बाकी जीवन पूर्णरूप से केवल तुमको अर्पित है, अधर मौन हैं लेकिन फिर भी प्रेम तुम्हारा मुखरित है. मधुरिम प्रातः सुन्दर संध्या और सलोनी रातें हैं, भीतर मन में मिश्री घोलें मीठी मीठी बातें हैं, प्रेम तुम्हारा निर्मल पावन पाकर तनमन हर्षित है, अधर मौन हैं लेकिन फिर भी प्रेम तुम्हारा मुखरित है. (अरुन शर्मा 'अनन्त')

के द्वारा: अरुन शर्मा 'अनन्त' अरुन शर्मा 'अनन्त'

बात उन लम्हों की... जब पहली बार मिली पिया से नज़र उनका अनमोल प्यार मेरे दिल में बसा एक अजब सी कशिश है उनसे नजदीकियों में, छा गया मेरे मन पे उनके प्यार का कहकशां, जैसे ही उन्होंने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया लगा कि सागर नदी की लहरों में ही जा बसा। जैसे ही उन्होंने मेरे तन को छुआ मन पर छा गया उनके प्यार का नशा जैसे ही हुआ मेरा आलिंगन मेरे पिया से मदहोश हो गयी पवन और रिमझिम सावन बरसा मेरा और उनका प्रेम हमेशा बना रहे है रब से दुआ कि खुशियों से भरा रहे हमारा संसार ये पवित्र बंधन हमेसा फलता रहे जो है प्यार के मोती में गुथा हुआ सा मैं तो रंगी हूँ आपके प्यार के रंग में और रहूंगी मैं यूं ही आपके साथ सदा।

के द्वारा: Manish Pandey Manish Pandey

के द्वारा: अरुन शर्मा 'अनन्त' अरुन शर्मा 'अनन्त'

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ज्जाने कब कौन जिंदगी का हिस्सा बन जाये..... 'टूटती बिखरती संवरती कुम्हार की माटी सी,? जलती ,पिधलती संवरती मोम की बाती सी खोल पलको के किवाड वो... च्ुापके से आ जाती है वो ख्बाबों में मेरे। कभी सोचा ही नहीं था कि दिल के दरवाजों को खोल कर उन्हें इतनी आजादी दूगी कि वो अपनी भावनाओं को अभिवयक्त कर सके, पर सोचने से ही अगर सब कुछ हो जाता तो जीवन में कुछ भी अंसम्भव नही होता...न चाहते हुए भी वो दिल के जाने कौनसे दरिचों से एक मधुर संगीत की तरह एक ठंडे हवा के झोंके के तरह मेरे मन मस्तिश्क में अपना धर कर गयें। मैं उस प्यार को समझ पाती, जान पाती या उस अहसास को कोर्इ नाम दे पाती इससे पहले ही मैं उसकी गिरफत में थी, जाने क्यों वो कैद अच्छी लग रही थी, मन के किसी कोने से ये आवाज आ रही थी कि काष ये कैद उम्रभर के लिये हो, वो दर्द भी उस वक्त अजीज लग रहा था जिसे मैं महसूस कर रही थी, मेरी निगाहों मे ंएक खुमार था पर पता नही वो कया था, पर देखने वालो ने मुझे बताया वो प्यार था, ववो प्यार था.....अगर वो सच में प्यार था तो मुझे ये अहसास इतना बाद में क्यों हुआ सच! प्यार कब हो जाता है कोर्इ नही जानता लेकिन जब हो जाता है तो खुद के सिवा सारे जमाने को पता चल जाता है। प्यार है ही एक ऐसा एहसास जो तब होता है जब हम खुद में नही होते?काष—प्यार सबके जीवन में होता।

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राइट टू रिजेक्ट ही मतदान की अनिवार्यता का जन-जन को अहसास करायेगा: शास्त्री पीएम उम्मीदवारों के नाम ‘‘सत्यमेव जयते‘‘ का एजेण्डा जारी --------------------------------------------- इटावा, 24 जनवरी। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर हम सभी भारतीयों को संसदीय जनतंत्र को सुदृृढ़ बनाने के लिए अपने मतदान का प्रयोग अवश्यमेव करने का संकल्प लेना होगा। राष्ट्रीय मतदाता दिवस की पूर्व संध्या पर सत्यनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की अगुआई वाले संगठन ‘‘सत्यमेव जयते’’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता देवेश शास्त्री ने वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि मतदान के प्रति उदासीनता स्वाभाविक है, क्योंकि जनसामान्य ‘‘राजनीति के अपराधीकरण और विश्वासघाती कार्यशैली’’ से आहत है, लिहाजा वोट न देकर ही सन्तोष कर लेता है, जबकि लोकतंत्र का आधार मतदान है, वह जीवन की अहम् आवश्यकताओं में भी सर्वोपरि है। ऐसी स्थिति में ईवीएम में विकल्पों को नकारने यानी ‘‘रिजेक्ट’’ का बटन होना आवश्यक है। श्री शास्त्री का मानना है कि राइट टू रिजेक्ट ही मतदान की अनिवार्यता का जन-जन को अहसास करा देगा और राजनैतिक दल भी साफ छवि के उम्मीदवारों को ही चुनाव मैदान में उतारने को विवश होंगे। इसी के साथ राष्ट्रीय मतदाता दिवस की सार्थकता सिद्ध हो जायेगी। श्री शास्त्री ने कहा कि जनतंत्र का अर्थ ही है- ‘‘जनता द्वारा जनता के लिए, जन-व्यवस्था।’’ लिहाजा सूचना प्रोद्योगिकी के इस क्रांति दौर में देशवासी ‘‘भारतवर्ष’’ को ऐसे विकसित गणराज्य के रूप में देखना चाहते हैं, जो दुनिया में ‘‘प्रभुता सम्पन्न यानी विष्वगुरु’’ का दर्जा प्राप्त हो। इसके लिए भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिले। देशवासियों को चीन और पाकिस्तान द्वारा कब्जाई गई हमारी जमीन वापस चाहिए। सत्यमेव जयते की ओर से आसन्न लोकसभा चुनाव में विभिन्न राजनैतिक दलों तथा गठबंधनों द्वारा घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों तथा पार्टी अध्यक्षों के नाम भारतवर्ष के लोगों की भावना को व्यक्त करने वाला 25 सूत्रीय एजेंड़ा जारी करते हुए श्री शास्त्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों का जन सामान्य से सीधा सम्पर्क रहता है, लिहाजा जन सामान्य की नब्ज टटोलते हुए ये एजेंडा तैयार किया गया है। देश के प्रत्येक जिले से राज्य की राजधानी को जोड़ने वाली 4/6 लेन सड़कें, तथा प्रत्येक गांव से तहसील-ब्लाक तक जाने के लिए हाट मिक्स सड़कें चाहिए। देश को उच्च गुणवत्ता की सार्वजनिक परिवहन की जरूरत है, जिसमें पर्याप्त सीटें हों, जैसी चीन आदि देषों में हैं तथा डबल ट्रैक, विद्युतीकृत रेल, बुलेट ट्रेन एवं ऐसी हवाई सेवाएं चाहिए, जिसमें साधारण श्रमिक को भी को त्वरित गति से आने जाने की सुविधा हो। उन्होंने भ्रष्टाचार-मुक्त, आतंक-मुक्त और गुंडा-मुक्त राष्ट्र की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकारी सेवा में जन सुविधा को पारदर्शी बनाने हेतु सभी कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरों की जरूरत है, ताकि भ्रष्टाचार मिट सके। आॅनलाइन षिकायत करने और निस्तारण की सूचना घर बैठे मिलने और आॅनलाइन एफआईआर करने और सिटीजन चार्टर के अनुरूप निर्धारित समयावधि में मामलों को निपटाने की जरूरत है। इस तरह निर्वाचित जनसेवकों और प्रषासनिक लोकसेवकों के अनावष्यक भ्रमण एवं दौरों के लिए सार्वजनिक धन के अपव्यय को रोका जा सकता है। इसके साथ ही सचल (मोबाइल) तहसील प्रणाली की जरूरत है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली से मिलने वाले राशन और ईंधन (कुकिंग गैस) सब्सिडी सीधे बैंक खाते में पहुंचे। श्री शास्त्री ने कहा कि आतंक, गुंडई और आपराधिक वातावरण का मुख्य कारण है ‘‘बेकारी।‘‘ हमने बचपन में पढ़ा था कि जनसंख्या देष पर बोझ है, इस लिहाज से हम सभी बोझ हुए, ऐसा नहीं प्रत्येक व्यक्ति देष के लिए यथा-सामथ्र्य योगदान देने को तत्पर हैं। हमारे मानव संसाधन (मानवीय ऊर्जा) का सदुपयोग हो। समाज के सभी वर्गों के उत्थान की जरूरत है। सभी को अपने ही ब्लाक-जिले में क्षमता के अनुसार गुणवत्ता परक रोजगार की जरूरत है। शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सभी गांव व शहर में जो मौजूदा पब्लिक स्कूलों को उच्च तकनीकी सुविधाओं वाले राजकीय विद्यालय मंे परिवर्तित करने किया जाये। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाते हुए हर 5 किलोमीटर की परिधि में उच्च तकनीक अस्पताल की जरूरत है। कृषि प्रधान देश भारतवर्ष में हर खेत को सिंचाई हेतु पर्याप्त पानी मिले, नहरों व माइनरों का अनावश्यक कटाव रोका जाये। पूरे देश को 24 घंटे बिजली और पीने के पानी के लिए सभी गाँव - मोहल्लों में पानी की टंकी की हो। यदि दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए इस एजेंडे को स्वीकार किया जाये तो निश्चित रूप भारतवर्ष प्रभुता सम्पन्न देश हो जायेगा।

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नव वर्ष 2014 की शुभकामनाएं (कुछ संकलित शुभकामना सन्देश) दुआओं की सौगात लिए; दिल की गहराइयों से; चाँद की रौशनी से; फूलों के काग़ज़ पर; आपके लिए सिर्फ तीन लफ्ज़; नया साल मुबारक! आपकी आँखों में सजे हैं जो भी सपने; और दिल में छुपी हैं जो भी अभिलाषाएं; यह नया वर्ष उन्हें सच कर जाए; आपके लिए यही है हमारी शुभकामनाएं! नव वर्ष की शुभकामनाएं! एक दुआ मांगते हैं हम अपने भगवान से; चाहते हैं आपकी ख़ुशी पूरे ईमान से; सब हसरतें पूरी हों आपकी; और आप मुस्कुराएं दिल-ओ-जान से। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! दुआ मिले बंदो से, साथ मिले अपनों से; रहमत मिले रब से, प्यार मिले सब से; यही दुआ है मेरी रब से कि, आप खुश रहें सबसे। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! ख़ुदा करे कि इस नए साल; जिसे आप चाहते हो वो आपके पास आ जाए; आप सारा साल कंवारे ना रहे; आपका रिश्ता लेकर आपकी सास आ जाए। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! नव वर्ष की पावन बेला में है यही शुभ संदेश; हर दिन आए आप के जीवन में लेकर ख़ुशियाँ विशेष। नव वर्ष की शुभकामनाएं! सबको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें.परमात्मा इस नये वर्ष में आपके जीवन में बहुत सी नई खुशिया लाएं.नया वर्ष ढेर सारी सफलता और आशीषों से भरा हुआ हो. संकलनकर्ता-सद्गुरुजी.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

http://amankumaradvo.jagranjunction.com/?p=६७९१२६ नव वर्ष के लिए कुछ सोचा है …. पोस्टेड ओन: 31 Dec, 2013 Celebrity Writer, Contest, Entertainment में Rss Feed SocialTwist Tell-a-Friend आगामी वर्ष मे मे बहुत कुछ करना चाह रहा हु सबसे पहेले तो मेरे स्वभाव के अनुसार मुझे अति सर्वत्र वर्जयेत(सब जगह अति करने से बचना है ) अति का भला न बोलना, अतिकी भली न चूप । अतिका भला न बरसना अतिकि भली न धूप । जो अपने लिये प्रतिकूल हो, वैसा आचरण या व्यवहार दूसरों के साथ नहीं करना करूंगा । (श्रूयताम धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवानुवर्यताम । आत्मनः प्रतिकूलानि, परेषाम न समाचरेत ।।) परन्तु दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना चाहिये। ( शठे शाठ्यम समाचरेत् ) जीवन मे चाणक्य के सूत्र लागु करने का प्रयास रहेंगा ………. जैसे की सबसे बडा मंत्र है कि अपने मन की बात और भेद दूसरे को न बताओ। अन्यथा विनाशकारी परिणाम होंगे।लोग उसका फायदा लेने की तक मे रहेते है | व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिये। सीधे तने के पेड सबसे पहिले काटे जाते हैं। ईमानदार आदमी को मुश्किलों में फ़ंसाया जाता है।थोडी सी सोच तो ज़माने के साथ की हो जो उसे समझ सके | जैसे अगर कोई सांप जहरीला नहीं हो तो भी उसे फ़ूफ़कारते रहना चाहिये। आदमी कमजोर हो तो भी उसे अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिये | मित्रता में भी कुछ न कुछ स्वार्थ तो होता ही है। स्वार्थ रहित मित्रता असंभव है।पर मित्रता भी जरूरी है |मेरे लिए | कोइ भी काम शुरु करने से पहिले अपने आप से तीन प्रश्न के जबाब लूँगा । मैं यह काम क्यों कर रहा हूं? इस कार्य का क्या परिणाम होगा? और क्या मुझे इसमें सफ़लता हासिल होगी? संसार मे सर्वाधिक शक्ति युवावस्था और नारी के सौंदर्य में होती है।जिसके प्रति सतर्क भाव रखूंगा | क्रोध यमराज के समान है,उसके कारण मनुष्य मृत्यु की गौद में चला जाता है। तृष्णा वैतरणी नदी के समान है जिसके कारण मनुष्य को सदैव कष्ट झेलने पडते हैं।अपने अप्रत्यषित क्रोध पर नियंत्रण रखना है मुझे | विद्या कामधुनु के समान है।अपने ज्ञान को समर्द्ध करने का प्रयास रहेंगा क्युकी व्यक्ति विद्या हासिल कर उसका फ़ल कहीं भी प्राप्त कर सकता है। संत्तोष नंदन वन के समान है। मनुष्य इसे अपने में स्थापित करले तो उसे वही शांति मिलेगी जो नंदन वन में रहने से मिलती है।संतोष जरूरी है झूठ बोलना,उतावलापन दिखाना,दुस्सहस करना,छलकपट करना,मूर्खता पूर्ण कार्य करना,लोभ करना,अपवित्रता और निर्दयता ये सभी स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं।जिससे बचना मेरी प्रथमिकता है | भोजन के लिये अच्छे पदार्थ उपलब्ध होना ,उन्हें पचाने की शक्ति होना,प्रचुर धन के साथ दान देने की इच्छा होना, ये सभी सुख मनुष्य को बडी कठिनाई से प्राप्त होते हैं।जिनका सरक्षण करूंगा जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपडी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके काम बिगाड देता हो उसे त्यागने में ही भलाई है।वह उस बर्तन के समान है जिसके बाहरी हिस्से पर दूध लगा हो लेकिन अंदर विष भरा हो।ये मित्र दूर रहे मुझस वे माता-पिता अपने बच्चों के लिये शत्रु के समान हैं,जिन्होने बच्चों को अच्छी शिक्छा नहीं दी। क्योंकि अनपढ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के समूह में बगुले की स्थिति होती है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूंछ के जानवर जानवर जैसा होता है मित्रता बराबरी वाले व्यक्तियों में करना ठीक होता है। सरकारी नौकरी सर्वोत्तम होती है।अच्छे व्यापार के लिये व्यवहार कुशलता आवश्यक है।और सुशील स्त्री शोभा देती है। जिस प्रकार पत्नि के वियोग का दु:ख,अपने भाई बंधुओं से प्राप्त अपमान का दुख असहनीय होता है,उसी प्रकार कर्ज से दबा व्यक्ति भी सदैव दुखी रहता है।दुष्ट राजा की सेवा मेम रहने वाला नौकर भी दुखी रहता है।कर्ज़ से तोबा ! तोबा ! मूर्खता के समान योवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति गलत मार्ग पर चल देता है।इसका ख्याल सबके लिए जरूरी है जो व्यक्ति अच्छा मित्र न हो उस पर विश्वास मत करो लेकिन अच्छे मित्र पर भी पूरा भरोसा नहीं करना चाहिये क्योंकि कभी वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है ।इसलिये हर हालत में सावधानी बरतना आवश्यक है। साथ ही धुम्रपान – मधपान से दूरी मैरा स्वं ,परिबार, समाज ,आवास, कार्यलय ,नगर ,देश हित मे जीवन आदर्शो की स्थापना और उनका विकास सभी तरहा से हो यही मेरा प्रयास और लक्ष्य रहेंगा | मेरे पास विधि ज्ञान भी है जिसका उपयोग मे समाजहित मे करता रहूँगा …… देश निर्माण मे हर संभव प्रयास करूंगा और जनसमहू को प्रेरित करूंगा ………….. एक प्रयास " निशुल्क विधिक सहयता केंद्र , एक प्रयास \ इसको अन्य नगरो मे ले जाना है ………. तथा अस्तु ………आमीन …गॉड! ब्लिस तो आल ! सबको शुभ कामनाये!

के द्वारा: aman kumar aman kumar

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सरकार एवं कुछ सरकारी लोग जनता के लिए बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं आखिर क्यों ? काम चोर घूसखोर सरकारी मशीनरी की सैलरी का बोझ अब देश की गरीब जनता पर नहीं पड़ने देने का संकल्प लेना चाहिए।यह सबसे बड़ा पुण्य एवं पवित्र कार्य होगा ! ऐसी बातों से कम से कम सबको पता तो लग जाता है कि आम आदमी के विषय में इन की सोच क्या है! सच्चाई ये है कि ईमानदारी का अभाव एवं भ्रष्टाचार की अधिकता तथा जनता के प्रति संवेदन हीनता ने ऐसी सरकारों तथा ऐसे सरकारी कर्मचारियों को न केवल अविश्वसनीय बना दिया है अपितु ये देश के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं आखिर टैक्स रूप में दिए गए धन से जनता ऐसे लोगों का एवं उनके बीबी बच्चों का भार क्यों उठावे!जब कुछ कर पाना तो इनके बश का है ही नहीं किन्तु क्या इनकी बातों में भी संवेदन शीलता नहीं होनी चाहिए? सरकारी लोग जनता के दस लाख रूपए खर्च करके भी उतना काम नहीं कर पाते हैं जितना क्या और उससे अच्छा एवं अधिक काम प्राइवेट लोग एक लाख रूपए में करके दिखा देते हैं। इसी प्रकार सरकारी स्कूल लाखों रूपए खर्च करके भी उतना अच्छा प्रतिफल नहीं दे पाता है प्राइवेट स्कूल जितना उनसे बहुत कम धन खर्च करके दे देता है!यही स्थिति सरकारी अस्पतालों see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2013/12/blog-post_27.html

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आदरणीय संजय जी,शुभप्रभात.यहाँ आया तो इस सप्ताह के बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक पर आप की प्रतिक्रिया देखी.आप बहुत बुद्धिमान और सुलझे हुए व्यक्तित्व वाले ब्लॉगर है.नए ब्लॉगरों में आप ने अपनी अच्छी पहचान बना ली है.परन्तु आप की प्रतिक्रिया देखकर मुझे हैरानी हो रही है.बेस्ट ब्लॉगर के चयन का पूरा अधिकार संपादक महोदय अथवा जागरण परिवार को है और हमें उनके चुनाव को स्वीकार करना चाहिए.बेस्ट ब्लॉगर के चुनाव पर इस तरह से सवाल उठाना संपादक महोदय,जागरण परिवार के साथ साथ उस ब्लॉगर का भी अपमान है,जिसे इस सम्मान के लिए चुना गया है.बेस्ट ब्लॉगर के चयन की आलोचना करने की जो नई पम्परा इस मंच पर शुरू हुई है,वो बहुत गलत है.आप बहुत संवेदनशील व्यक्ति हैं,जरुर आपके मन को कोई ठेस लगी है,लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है की आप मेरी बात पर भी विचार करेंगे.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार,महोदय सादर हरि स्मरण ! आप लोगों ने इस मंच पर मुझे जो भी सम्मान दिया है,उसके लिए ह्रदय से धन्यवाद.मै आप लोगों से एक आग्रह करना चाहता हूँ कि इस मंच के ब्लॉगर आदरणीय अनिल कुमार "अलीन" जी के साफ्टवेयर को ठीक कर उन्हें बिना किसी बढ़ा के पुन:लिखने कि अनुमति दी जाये.बीच में जब उनका ब्लॉग पेज खुल रहा था,तब मैंने उनके लेख पढ़े थे.उनके लेख उच्च स्तर के हैं और पाठकों के लिए उपयोगी और शिक्षाप्रद हैं.इस समय पाठक उनके नए लेखों से वंचित हो रहे हैं.जीवन का कोई भरोसा नहीं है कि कौन कब तक जियेगा ? इसीलिए सच कहने वाले ऐसे विद्वान जब तक इस संसार में हैं,तब तक उनके विचार और अनुभव लोगों के बीच प्रसारित होना चाहिए और ये लोगों पर छोड़ दिया जाये की क्या वो पसंद करते हैं और क्या नहीं ? उनके किसी लेख में कोई आपत्तिजनक बात होगी तो जरुर आप से शिकायत करेंगे और आप कार्यवाही भी कीजियेगा,परन्तु फ़िलहाल अभी उन्हें ब्लॉग लिखने व् पोस्ट करने की अनुमति दी जाये.मै पहले की बातें नहीं जानता,परन्तु सच कहने वाले ऐसे विद्वान व्यक्ति से यदि जाने अनजाने कुछ गलतियां भी हुईं हैं तो उसे क्षमा करते हुए उन्हें पुन:ब्लॉग लिखने और पोस्ट करने की अनुमति प्रदान की जाये.इससे अनगिनत पाठकों को लाभ होगा.मेरी जानकारी के अनुसार उनके ब्लॉग के पाठक सबसे ज्यादा हैं.यदि आप लोग तत्काल अनिल कुमार अलीन जी के सॉफ्टवेयर को ठीक कर उन्हें लिखने और पोस्ट करने की सुविधा पुन:प्रदान करते हैं तो मुझे ही नहीं बल्कि इस मंच के सभी ब्लॉगरों को बहुत ख़ुशी होगी.सादर धन्यवाद और शुभकामनाओं सहित.

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आदरणीय सद्गुरु जी, आपका प्रयास वास्तव में सराहनीय है. ऑनलाइन मीडिया में किसी भी लेख का लिंक जानने के कई तरीके हैं. आपने जिस प्रकार लिंक चुना है वह भी एक तरीका हो सकता है. किन्तु एक आसान तरीका अगर आप अपनाना चाहें तो अपना सकते हैं. इसके लिए आपको अलग से कुछ नहीं करना है. बस खुले हुए लेख के ऊपर जो लिंक दिख रहा होगा, उसके ऊपर कर्सर (जो तीर का निशान दिखता है) ले जाकर बस एक बार क्लिक करें या उसे सलेक्ट कर राइट क्लिक कर कॉपी कर लें. इसे आप जहां वर्ड फाइल में जहां पेस्ट करना चाहते हैं, ctrl + v दबाकर या राइट क्लिक कर पेस्ट का ऑप्शन सेलेक्ट कर पेस्ट कर लें. उदाहरण के लिए अगर आपने निशा मित्तल जी का 'आत्मग्लानि (एक लघु कथा)' खोला गूगल क्रोम ब्राउजर में रिफ्रेश शाइन के बगल में आपको इसका लिंक 'nishamittal.jagranjunction.com/2013/10/03/आत्मग्लानी/' नजर आएगा. इसे कॉपी कर जब आप वर्ड फाइल या जंक्शन डैशबोर्ड में 'एड न्यू' पोस्ट में जाकर भी पेस्ट करेंगे या कहीं और भी, तो यह इस तरह पेस्ट होगा: 'http://nishamittal.jagranjunction.com/2013/10/03/%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80/'. आप चाहें तो इसे ऐसे भी रख सकते हैं या छोटा भी कर सकते हैं. यूआरएल (link) छोटा कैसे करें? सबसे पहले गूगल पर जाकर 'bitly ' (https://bitly.com/) खोल लें. सबसे ऊपर आपको shorten key और box (paste a link to shorten it) नजर आएगा. जिस भी लेख का लिंक कॉपी किया हो और शॉर्ट करना हो, बॉक्स में पेस्ट कर shorten पर क्लिक करें. लिंक शॉर्ट होकर आ जाएगा और shorten key की जगह आपको copy बटन नजर आएगा. copy पर क्लिक करते ही वह कॉपी हो जाएगा और ऊपर बताई दोनों विधियों (ctrl+v या right click) के द्वारा इसे पेस्ट कर लें. इसके अलावे एक और विधि आप सीधे अपने add new post में भी उपयोग कर सकते हैं. Add New Post विधि: जिस भी लेख का लिंक पोस्ट में शामिल करना चाहते हों, उदाहरणार्थ अगर निशा जी का 'आत्मग्लानी (एक लघु कथा)' का लिंक डालना हो, उसे 'आत्मग्लानी (एक लघु कथा)' शीर्षक पेस्ट करें. उसे सेलेक्ट करें और ऊपर insert/edit link पर क्लिक करें (align right के बगल में आपको यह ऑप्शन मिलेगा). एक बॉक्स खुलेगा जिसमें सबसे ऊपर Link URL में लेख का लिंक पेस्ट करें. उसके नीचे Anchors में कुछ न करें. Target में नीचे की तरफ जाते ब्लैक ऐरो को क्लिक करने पर चार ऑप्शन खुलेंगे. दूसरा ऑप्शन 'open in new window (_blank)' सेलेक्ट कर नीचे Insert बटन पर क्लिक करें. इस तरह नीले रंग में दिख रहे शीर्षक में उसका लिंक भी अटैच हो गया होगा और पोस्ट पब्लिश करने के बाद लेख के शीर्षक पर क्लिक कर सीधे लेख के लिंक पर जाया जा सकता है. जंक्शन पोस्ट में किसी भी लेख में लिंक लगाने के लिए आप इस विधि का प्रयोग कर सकते हैं. धन्यवाद! जागरण जंक्शन परिवार

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